कोल्हापुर में मिली नई फफूंद प्रजाति, जैव विविधता में जुड़ा नया नाम

कोल्हापुर में मिली नई फफूंद प्रजाति, जैव विविधता में जुड़ा नया नाम

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में फफूंद विज्ञान से जुड़ी एक अहम खोज सामने आई है। भुदरगड तालुका के बेदिव क्षेत्र में सड़ी हुई लकड़ी पर मिली नई पॉलीपोर फफूंद प्रजाति का नाम Microporellus kolhapurensis रखा गया है। यह खोज 27 जुलाई 2026 को दर्ज की गई और इससे कोल्हापुर की जैव विविधता सूची में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

सड़ी लकड़ी पर मिली दुर्लभ प्रजाति

यह फफूंद अजरा सीमा के पास भुदरगड तालुका में पाई गई। इसे राजाराम कॉलेज, कोल्हापुर की वनस्पति विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि पाटिल और शोधार्थी योगेश पाटिल ने पहचाना। यह प्रजाति पॉलीपोर या ब्रैकेट फंगस समूह से संबंधित है, जो आमतौर पर लकड़ी पर उगती हैं और इनके फलनकाय की निचली सतह पर छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। फफूंद को सड़ी हुई लकड़ी से एकत्र किया गया, जो सैप्रोट्रॉफिक फफूंदों का सामान्य आवास होता है। ऐसे जीव मृत जैविक पदार्थ को तोड़कर पोषक तत्वों को मिट्टी में लौटाते हैं और वन पारिस्थितिकी में अपघटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।

पहचान में किन लक्षणों ने मदद की

नई प्रजाति की पहचान उसके बाहरी और सूक्ष्म लक्षणों के आधार पर की गई। इसका फलनकाय पीले-नारंगी से लेकर धूसर-भूरे रंग का, छतरीनुमा और पार्श्वीय डंठल वाला है। इसमें बड़े छिद्र, अश्रु-आकार के बीजाणु और मोटी दीवार वाली सिस्टिडिया पाई गई हैं। फफूंद वर्गीकरण में ऐसे लक्षण बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर किसी प्रजाति को उसके निकट संबंधी टैक्सा से अलग पहचाना जाता है। फफूंदों के वर्णन में सामान्यतः आवास, बीजाणु का आकार, छिद्रों की बनावट और सिस्टिडिया जैसी संरचनाओं का उल्लेख किया जाता है।

महाराष्ट्र की फफूंद विविधता में नया योगदान

यह शोध नेलुम्बो पत्रिका में प्रकाशित हुआ, जो भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण से जुड़ी शोध पत्रिका है। इस खोज से न केवल कोल्हापुर जिले की फफूंद विविधता का दस्तावेजीकरण मजबूत हुआ है, बल्कि महाराष्ट्र में दर्ज पॉलीपोर प्रजातियों की सूची भी समृद्ध हुई है। अब तक Microporellus वंश की लगभग 36 मान्य प्रजातियां विश्व स्तर पर दर्ज की गई हैं। महाराष्ट्र से इस वंश की पहले केवल Microporellus obovatus प्रजाति ही रिकॉर्ड की गई थी। ऐसे में नई प्रजाति का मिलना राज्य के वन क्षेत्रों में अब भी अनदेखी जैव विविधता की मौजूदगी की ओर संकेत करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पॉलीपोर फफूंद को ब्रैकेट फंगस भी कहा जाता है, क्योंकि कई प्रजातियां लकड़ी पर शेल्फ जैसी संरचना बनाती हैं।
  • सैप्रोट्रॉफिक फफूंद मृत पौधों और लकड़ी को विघटित कर पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करती हैं।
  • Microporellus वंश में विश्व स्तर पर लगभग 36 मान्य प्रजातियां दर्ज हैं।
  • महाराष्ट्र से इस वंश की पहले केवल Microporellus obovatus प्रजाति दर्ज थी।

कोल्हापुर के नाम पर रखी गई यह प्रजाति स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक महत्व को रेखांकित करती है। साथ ही यह दिखाती है कि वन क्षेत्रों में सूक्ष्म जीवों की दुनिया अभी भी कई नई खोजों की संभावना समेटे हुए है।

Originally written on July 28, 2026 and last modified on July 28, 2026.

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