हरियाणा से कनाडा तक जमी हुई खाद्य सामग्री की नई निर्यात पहल
हरियाणा के सोनीपत से जमी हुई खाद्य सामग्री की एक खेप कनाडा के लिए रवाना की गई। इस निर्यात पहल को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी एपीडा ने सुगम बनाया। 24 मीट्रिक टन वजनी इस खेप में 2,295 डिब्बे शामिल थे, जिनमें हरी मटर, मिक्स्ड सब्जियां, मटर-गाजर, स्वीट कॉर्न और समोसा जैसे उत्पाद थे।
एफपीओ की भूमिका से बढ़ी निर्यात क्षमता
इस खेप का नेतृत्व अटर्ना फूड्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने किया, जो एक किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ है। भारत में एफपीओ किसानों को एक साथ जोड़कर उत्पादन, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और विपणन की सुविधा देते हैं। निर्यात के लिए ऐसी सामूहिक संरचना खास तौर पर उपयोगी मानी जाती है, क्योंकि इससे छोटे किसानों की उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होता है।
इस मामले में एफपीओ ने मूल्यवर्धित और जमे हुए खाद्य उत्पादों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। खेप का कुल मूल्य 35,140 कनाडाई डॉलर बताया गया है। एपीडा ने इस निर्यात इकाई को अपनी वित्तीय सहायता योजना के तहत सहयोग दिया।
एपीडा की भूमिका और निर्यात पारिस्थितिकी
एपीडा भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत की गई थी। इसका मुख्य काम अनुसूचित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को विकसित और प्रोत्साहित करना है।
एपीडा निर्यातकों को बाजार विकास, गुणवत्ता सुधार, बुनियादी ढांचे के समर्थन और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान करता है। साथ ही यह उत्पादक समूहों, निर्यातकों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करता है। ऐसे प्रयासों से भारत के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात को नई गति मिलती है।
जमे हुए खाद्य उत्पादों का बढ़ता महत्व
जमे हुए खाद्य उत्पाद कम तापमान पर संरक्षित किए जाते हैं, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ती है और लंबी दूरी तक परिवहन आसान होता है। भारत से निर्यात होने वाले ऐसे उत्पादों में जमी हुई सब्जियां, रेडी-टू-कुक आइटम और अन्य मूल्यवर्धित खाद्य सामग्री शामिल रहती है।
इस तरह के निर्यात में गुणवत्ता, पैकेजिंग, कोल्ड चेन और समयबद्ध आपूर्ति की अहम भूमिका होती है। राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान यानी निफ्टेम भी इस प्रयास से जुड़ा रहा, जो खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन के क्षेत्र में काम करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एपीडा की स्थापना एपीडा अधिनियम, 1985 के तहत की गई थी।
- एपीडा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- एफपीओ किसानों का सामूहिक संगठन होता है, जो उत्पादन से लेकर विपणन तक मदद करता है।
- निफ्टेम खाद्य प्रौद्योगिकी और उद्यमिता से जुड़ा एक प्रमुख संस्थान है।
कनाडा के लिए यह खेप भारत के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में एफपीओ-आधारित मॉडल की उपयोगिता को दिखाती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि संगठित किसान समूह और संस्थागत सहयोग मिलकर वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ा सकते हैं।