परवीन हुड्डा ने एशियाई खेलों में भारत को दिलाया महिला 65 किग्रा मुक्केबाजी स्वर्ण
परवीन हुड्डा ने जापान के आइची-नागोया में 2 अक्टूबर 2026 को एशियाई खेलों की महिला 65 किग्रा मुक्केबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए बड़ी उपलब्धि दर्ज की। फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे की चेन निएन-चेन को 3-2 के विभाजित निर्णय से हराया। यह जीत भारत की महिला मुक्केबाजी में लगातार मजबूत होती स्थिति को भी दिखाती है।
फाइनल में कड़ा मुकाबला, परवीन ने दिखाया संयम
महिला 65 किग्रा वर्ग अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी की मिडिलवेट श्रेणियों में आता है और इसमें मुकाबला आमतौर पर तकनीक, गति और सहनशक्ति का संतुलन मांगता है। परवीन ने फाइनल में दबाव के बीच बेहतर रणनीति अपनाई और करीबी मुकाबले में निर्णायक बढ़त हासिल की। 3-2 का स्कोर बताता है कि मुकाबला बेहद संतुलित था, लेकिन अंतिम निर्णय में परवीन ने बाजी मार ली।
फाइनल तक का सफर भी रहा प्रभावशाली
परवीन हुड्डा ने फाइनल में पहुंचने से पहले 29 सितंबर 2026 को सेमीफाइनल में चीन की ली शू को 5-0 से हराया था। मुक्केबाजी में 5-0 का परिणाम सर्वसम्मत निर्णय को दर्शाता है, यानी सभी पांच जजों ने एक ही मुक्केबाज के पक्ष में फैसला दिया। इससे साफ है कि परवीन ने पूरे टूर्नामेंट में मजबूत लय बनाए रखी और निर्णायक मुकाबलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
विवादों और निलंबन के बाद वापसी का संदेश
परवीन हुड्डा का यह स्वर्ण पदक इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले उन्हें 22 महीने के निलंबन का सामना करना पड़ा था। अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने 21 मई 2024 को तीन ‘व्हेयरअबाउट्स फेल्योर’ के कारण यह निलंबन घोषित किया था, जो अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के बीच दर्ज हुए थे। इसी कारण उन्होंने एशियाई खेल 2023 का कांस्य पदक और पेरिस 2024 ओलंपिक कोटा भी खो दिया था। ऐसे में यह स्वर्ण उनके करियर की महत्वपूर्ण वापसी माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- परवीन हुड्डा एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली भारत की तीसरी महिला मुक्केबाज बनीं।
- उनसे पहले एम.सी. मैरी कॉम और लवलीना बोरगोहेन ने एशियाई खेलों में महिला मुक्केबाजी स्वर्ण जीता था।
- मुक्केबाजी में स्प्लिट डिसीजन का अर्थ है कि जजों का फैसला एकमत नहीं होता।
- अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी कई अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में एंटी-डोपिंग और अनुपालन से जुड़े मामलों को देखती है।
परवीन हुड्डा का यह स्वर्ण भारत के लिए एशियाई खेल 2026 में 13वां स्वर्ण भी रहा। इस उपलब्धि ने न केवल भारत की पदक तालिका को मजबूती दी, बल्कि महिला मुक्केबाजी में देश की गहराई और प्रतिस्पर्धी क्षमता को भी फिर से सामने रखा।