एशियाई खेलों में भारत का ऐतिहासिक स्वर्ण, महिला रिकर्व टीम ने रचा इतिहास
भारत ने 2 अक्टूबर 2026 को जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई खेलों में महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम स्पर्धा में अपना पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और कुमकुम मोहोद की भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराया। यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि दक्षिण कोरिया इस स्पर्धा में लंबे समय से दबदबा बनाए हुए था।
फाइनल में संयम और सटीक निशाने की जीत
ओकाज़ाकी चुओ सोगो पार्क मल्टीपर्पस स्क्वायर में खेले गए फाइनल में भारतीय टीम ने सेट-आधारित मुकाबले में बेहतर तालमेल दिखाया। रिकर्व तीरंदाजी में हर सेट का परिणाम तीनों खिलाड़ियों के संयुक्त स्कोर से तय होता है, इसलिए टीमवर्क, निरंतरता और मानसिक मजबूती बेहद अहम हो जाती है। भारत ने इसी संतुलन के दम पर कोरिया को मात दी और स्वर्ण अपने नाम किया।
सेमीफाइनल से फाइनल तक भारत का सफर
भारतीय महिला रिकर्व टीम ने फाइनल में पहुंचने से पहले सेमीफाइनल में चीन को 5-1 से हराया था। इससे टीम का आत्मविश्वास पहले ही बढ़ चुका था। 2023 एशियाई खेलों में भारत ने इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था, लेकिन इस बार टीम ने एक कदम आगे बढ़ते हुए स्वर्ण तक का सफर तय किया। यह प्रदर्शन भारतीय तीरंदाजी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रिकर्व तीरंदाजी ओलंपिक खेलों की आधिकारिक तीरंदाजी स्पर्धा है।
- एशियाई खेलों में तीरंदाजी के रिकर्व और कंपाउंड, दोनों प्रकार के इवेंट होते हैं।
- ओलंपिक में केवल रिकर्व तीरंदाजी शामिल होती है, जबकि कंपाउंड तीरंदाजी ओलंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है।
- दक्षिण कोरिया ने 1998 से महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में लगातार सात स्वर्ण पदक जीते थे, जो भारत की जीत से थम गया।
2 अक्टूबर 2026 तक भारत का कुल पदक आंकड़ा 70 तक पहुंच गया था, जिसमें 12 स्वर्ण, 24 रजत और 34 कांस्य शामिल थे। इस उपलब्धि ने न केवल भारत की पदक तालिका को मजबूती दी, बल्कि एशियाई तीरंदाजी में देश की बढ़ती प्रतिस्पर्धी क्षमता को भी सामने रखा।