MSME भुगतान विवादों पर सख्ती, लोकसभा से अहम संशोधन विधेयक पारित

MSME भुगतान विवादों पर सख्ती, लोकसभा से अहम संशोधन विधेयक पारित

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भुगतान में देरी, विवाद निपटान और डिजिटल इनवॉइस सेटलमेंट को मजबूत करने वाला संशोधन विधेयक 7 अगस्त 2026 को लोकसभा से पारित हो गया। यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब MSME क्षेत्र के लिए समय पर भुगतान और आसान ऋण-प्रवाह सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल हैं।

MSME कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी

भारत में MSME क्षेत्र को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी ढांचा मिला हुआ है। 2020 में निवेश और टर्नओवर के आधार पर वर्गीकरण प्रणाली को संशोधित किया गया था, जिससे विनिर्माण और सेवा, दोनों तरह के उद्यमों को नई परिभाषा मिली। इसके बावजूद, छोटे उद्यमों के सामने सबसे बड़ी समस्या देरी से भुगतान और लंबी विवाद प्रक्रिया बनी रही।

नए संशोधन का उद्देश्य इन्हीं अड़चनों को कम करना है, ताकि छोटे उद्यमों की कार्यशील पूंजी पर दबाव घटे और उनके लिए औपचारिक वित्त तक पहुंच आसान हो सके।

डिजिटल भुगतान और TReDS पर जोर

विधेयक के तहत सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों को MSME आपूर्तिकर्ताओं से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के बिलों का निपटान Trade Receivables Discounting System (TReDS) के माध्यम से करना होगा। यह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित एक डिजिटल मंच है, जो बिलों के बदले जल्दी भुगतान की सुविधा देता है।

TReDS की मदद से MSME विक्रेता अपने इनवॉइस के आधार पर समय से पहले धन प्राप्त कर सकते हैं, जबकि खरीदार बाद में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान करते हैं। इससे छोटे उद्यमों की नकदी स्थिति बेहतर होती है और भुगतान चक्र पारदर्शी बनता है।

विवाद निपटान और अनुपालन पर नई व्यवस्था

विधेयक में भुगतान संबंधी विवादों के समाधान को भी तेज करने की कोशिश की गई है। यदि किसी विवाद पर चुनौती छह महीने से अधिक लंबित रहती है, तो अदालतें खरीदार को यह निर्देश दे सकती हैं कि वह MSME आपूर्तिकर्ता को तय विवादित राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान करे।

इसके अलावा, भुगतान विवादों में मध्यस्थता की प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करने का प्रावधान रखा गया है। छोटे अनुपालन उल्लंघनों के लिए अब आपराधिक कार्रवाई के बजाय स्तरीय मौद्रिक दंड का रास्ता अपनाया गया है, जिससे नियमों का पालन भी हो और अनावश्यक दंडात्मक बोझ भी न बढ़े।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • MSME का पूरा नाम Micro, Small and Medium Enterprises है।
  • MSME विकास अधिनियम, 2006 भारत में इस क्षेत्र का प्रमुख कानूनी आधार है।
  • TReDS का अर्थ Trade Receivables Discounting System है और इसे RBI विनियमित करता है।
  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम वे कंपनियां हैं जो केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में होती हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, MSME को दिया गया बकाया ऋण 2014-15 में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026 तक 38.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह दिखाता है कि यह क्षेत्र भारत की औपचारिक ऋण व्यवस्था में कितना महत्वपूर्ण बन चुका है।

Originally written on August 8, 2026 and last modified on August 8, 2026.

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