आंध्र प्रदेश की नई पैदल सुरक्षा नीति से सुलभ शहरों की दिशा

आंध्र प्रदेश की नई पैदल सुरक्षा नीति से सुलभ शहरों की दिशा

आंध्र प्रदेश ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सार्वभौमिक सुगमता को एक ही ढांचे में जोड़ते हुए पैदल सुरक्षा एवं सार्वभौमिक सुगमता नीति, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। 6 अगस्त 2026 को मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद 7 अगस्त 2026 को जारी यह नीति सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों के लिए राज्यव्यापी मानक तय करती है।

नीति का दायरा और प्रशासनिक ढांचा

यह नीति शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण हिस्सों, सैटेलाइट टाउन और शहरी सीमावर्ती इलाकों पर भी लागू होगी। इसका उद्देश्य केवल फुटपाथ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें बाधा-मुक्त, सुरक्षित और सभी के लिए उपयोगी बनाना है। इसके लिए नगर निकायों, राजस्व अधिकारियों और राज्य पुलिस को समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।

नीति में सड़क किनारे पैदल चलने वालों के लिए ऐसी व्यवस्था पर जोर है, जिसमें आवागमन सुगम हो और सार्वजनिक अवसंरचना में अलग-अलग जरूरतों वाले लोगों को भी समान सुविधा मिले।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा पहलू

इस नीति को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय से जोड़ा गया है, जिसमें सुरक्षित और अवरोध-मुक्त फुटपाथों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना गया था। 7 अक्टूबर 2025 के S. Rajaseekaran बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले ने सड़क सुरक्षा और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को कानूनी और नीतिगत दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना दिया।

इसी पृष्ठभूमि में आंध्र प्रदेश की यह पहल सड़क सुरक्षा को केवल यातायात प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि नागरिक अधिकार और सार्वजनिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करती है।

डिजाइन मानक और प्राथमिकताएं

नीति के तहत भविष्य में बनने वाले और पहले से मौजूद, दोनों तरह के पैदल ढांचे को कुछ न्यूनतम मानकों के अनुरूप रखना होगा। इनमें कम से कम दो मीटर का साफ चलने योग्य क्षेत्र, फिसलन-रोधी सतह, दृष्टिबाधित लोगों के लिए टैक्टाइल इंडिकेटर, व्हीलचेयर रैंप, ब्रेल और श्रव्य संकेत शामिल हैं।

राज्य ने ऐतिहासिक दुर्घटना आंकड़ों के आधार पर 15 से 20 उच्च-घातक ब्लैकस्पॉट्स को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। साथ ही, पहले वर्ष में राज्य की कम से कम 20 प्रतिशत सड़कों पर सड़क-सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आंध्र प्रदेश पैदल सुरक्षा और सार्वभौमिक सुगमता के लिए एकीकृत राज्यव्यापी ढांचा अधिसूचित करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
  • भारत में 2023 के दौरान 1,72,890 सड़क दुर्घटना मौतें दर्ज की गईं, जिनमें 35,221 मौतें पैदल यात्रियों की थीं।
  • संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन के अधिकार की रक्षा करता है और सड़क सुरक्षा से जुड़े न्यायिक फैसलों में इसका उल्लेख होता रहा है।
  • नीति में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए टैक्टाइल संकेत, व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए रैंप, तथा ब्रेल और श्रव्य संकेत जैसी सुविधाएं अनिवार्य की गई हैं।

यह नीति आंध्र प्रदेश में सड़क डिजाइन, शहरी नियोजन और सार्वजनिक स्थानों की पहुंच को नए मानक देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। इससे पैदल यात्रियों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और समावेशी परिवेश बनने की उम्मीद है।

Originally written on August 8, 2026 and last modified on August 8, 2026.

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