आंध्र प्रदेश में निवेश और सुधारों को नई रफ्तार
आंध्र प्रदेश मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी नीति-2026 और आंध्र प्रदेश ओम्निबस (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) अधिनियम-2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में अमरावती में हुई बैठक में निवेश, औद्योगिक मंजूरी, सड़क सुरक्षा, क्वांटम अवसंरचना और जलीय कृषि से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गए।
पीपीपी नीति से बुनियादी ढांचे पर फोकस
नई पीपीपी नीति का उद्देश्य परिवहन, बंदरगाह, स्वास्थ्य, शिक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देना है। पीपीपी मॉडल में सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर परियोजनाओं की जिम्मेदारी, जोखिम और लाभ साझा करते हैं। राज्य ने ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग के तहत 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, ताकि वे परियोजनाएं भी आगे बढ़ सकें जो शुरुआती चरण में पूरी तरह आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं, लेकिन आगे चलकर राजस्व दे सकती हैं।
इसके साथ ही एक ब्रिज फंड का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसका उपयोग उन परियोजनाओं के लिए किया जाएगा जिनमें तत्काल वित्तीय व्यवहार्यता कम है, लेकिन दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं। यह कदम राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को गति देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
व्यवसाय सुगमता के लिए एकीकृत कानून
मंत्रिमंडल ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने के लिए ओम्निबस अधिनियम-2026 के मसौदे को भी मंजूरी दी। ओम्निबस कानून का अर्थ है ऐसा एकीकृत कानून, जिसमें कई प्रावधानों को एक ही ढांचे में समेट दिया जाता है। इससे विभागीय दोहराव कम होता है और प्रशासनिक प्रक्रियाएं मानकीकृत की जा सकती हैं।
इस अधिनियम का मकसद औद्योगिक अनुमतियों को सरल बनाना, लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज करना, अनुपालन बोझ घटाना और समयबद्ध मंजूरियों की व्यवस्था करना है। राज्यों में ऐसे सुधार निवेश आकर्षित करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
अन्य फैसले: सुरक्षा, क्वांटम हब और जलीय कृषि
कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश डिशा बिल, 2019 को वापस लेने का फैसला भी किया, क्योंकि इसे भारत के नए आपराधिक कानून ढांचे—भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)—के अनुरूप माना गया।
सड़क सुरक्षा और सुगम्यता को लेकर आंध्र प्रदेश पैदल यात्री सुरक्षा और सार्वभौमिक पहुंच नीति-2026 को मंजूरी दी गई। इसमें सड़क सुरक्षा ऑडिट, सीसीटीवी आधारित अतिक्रमण निगरानी और प्रशासनिक ढांचे में खामियों पर 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान शामिल है।
अमरावती में क्वांटम वैली ट्विन टावर्स के लिए 1,002.49 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और निर्माण कार्य लार्सन एंड टुब्रो को सौंपा गया। इसके अलावा, 1 जून 2026 से जलीय कृषि किसानों के लिए 1.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली शुल्क सब्सिडी बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिससे लगभग 1,150 करोड़ रुपये की राहत का अनुमान है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वायबिलिटी गैप फंडिंग उन परियोजनाओं को सहायता देती है जो सामाजिक रूप से उपयोगी हों, लेकिन शुरुआती वित्तीय रिटर्न कम होने के कारण निजी निवेशकों के लिए आकर्षक न हों।
- पीपीपी मॉडल का उपयोग आम तौर पर सड़क, बंदरगाह, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।
- BNS और BNSS भारत के नए आपराधिक कानून ढांचे का हिस्सा हैं, जिन्होंने पुराने कई आपराधिक कानूनों की जगह ली है।
- अमरावती आंध्र प्रदेश का राजधानी क्षेत्र है और क्वांटम वैली ट्विन टावर्स परियोजना यहीं विकसित की जा रही है।
इन फैसलों से साफ है कि आंध्र प्रदेश सरकार एक ओर निवेश और उद्योगों के लिए प्रक्रियाएं आसान करना चाहती है, तो दूसरी ओर सड़क सुरक्षा, ऊर्जा सहायता और नई तकनीकी अवसंरचना पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।