कचरे से ऊर्जा और असम में नया हाईवे, कैबिनेट की बड़ी मंजूरी

कचरे से ऊर्जा और असम में नया हाईवे, कैबिनेट की बड़ी मंजूरी

केंद्र सरकार ने 6 अगस्त 2026 को दो बड़े फैसलों को मंजूरी दी, जिनका कुल परिव्यय ₹32,701 करोड़ है। इनमें एक ओर GOBARdhan राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना है, जो जैविक कचरे से संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देगी, वहीं दूसरी ओर असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर एक चार-लेन नियंत्रित प्रवेश वाला कॉरिडोर बनाया जाएगा। दोनों परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम मानी जा रही हैं।

GOBARdhan योजना से जैविक कचरे को ऊर्जा में बदलने की तैयारी

GOBARdhan योजना के लिए ₹23,731 करोड़ का प्रावधान किया गया है और इसे 2026-27 से 2035-36 तक यानी 10 वर्षों में लागू किया जाएगा। इस योजना का संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय करेगा। इसका उद्देश्य गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग करके घरेलू स्तर पर संपीड़ित बायोगैस उत्पादन को बढ़ाना है।

योजना के तहत संपीड़ित बायोगैस की खरीद के लिए ₹2,110 प्रति MMBTU का निश्चित मूल्य तय किया गया है। इसके अलावा प्रति टन-प्रति-दिन क्षमता पर अधिकतम ₹2 करोड़ तक की पूंजी सहायता भी दी जाएगी। सरकार ने पात्र MSME ऋणों के लिए 85% क्रेडिट गारंटी को भी मंजूरी दी है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य

आधिकारिक आकलन के अनुसार, इस योजना से घरेलू संपीड़ित बायोगैस उत्पादन मौजूदा स्तर की तुलना में लगभग दस गुना तक बढ़ सकता है। इससे न केवल स्वच्छ ईंधन के उत्पादन को गति मिलेगी, बल्कि आयातित एलएनजी पर निर्भरता कम होने से विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी। अनुमान है कि इस योजना से 1.5 लाख से अधिक रोजगार सृजित हो सकते हैं।

यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कृषि अवशेष और पशु अपशिष्ट जैसी सामग्री का आर्थिक उपयोग संभव होगा। इससे कचरा प्रबंधन, स्वच्छ ऊर्जा और स्थानीय रोजगार, तीनों मोर्चों पर लाभ मिलने की संभावना है।

असम में 135.87 किमी का नया हाईवे कॉरिडोर

कैबिनेट ने असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर 135.87 किलोमीटर लंबे चार-लेन नियंत्रित प्रवेश वाले हाईवे प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है, जिस पर ₹8,970.20 करोड़ खर्च होंगे। यह कॉरिडोर गुवाहाटी के पास बाइहाटा चारियाली को तेजपुर से जोड़ेगा।

इस परियोजना में पांच बाईपास, 15 प्रमुख पुल और एक हाथी अंडरपास शामिल है। तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा भी बनाई जाएगी, जिसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से विकसित किया जाएगा। यह प्रावधान सामरिक और आपदा-प्रबंधन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संपीड़ित बायोगैस, बायोगैस का शुद्ध रूप है और इसे परिवहन तथा औद्योगिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
  • MSME का अर्थ Micro, Small and Medium Enterprises यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम है।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख सड़क गलियारा है।
  • आपातकालीन लैंडिंग सुविधा हाईवे का वह सीधा हिस्सा होता है, जिसका उपयोग आपात स्थिति में विमान की लैंडिंग के लिए किया जा सकता है।

इन दोनों फैसलों से सरकार की प्राथमिकताएं साफ दिखती हैं—एक ओर स्वच्छ ऊर्जा और अपशिष्ट से संसाधन बनाने की दिशा, दूसरी ओर पूर्वोत्तर में बेहतर सड़क संपर्क और रणनीतिक ढांचे का विस्तार।

Originally written on August 7, 2026 and last modified on August 7, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *