INSAT-3DR: मौसम पूर्वानुमान की रीढ़ बना भारतीय उपग्रह

INSAT-3DR: मौसम पूर्वानुमान की रीढ़ बना भारतीय उपग्रह

भारत के मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात निगरानी और आपदा प्रबंधन तंत्र में INSAT-3DR की भूमिका लगातार अहम बनी हुई है। 8 सितंबर 2016 को GSLV-F05 से प्रक्षेपित यह भारतीय मौसम उपग्रह भू-स्थिर कक्षा में काम करता है और भारत तथा आसपास के क्षेत्रों के लिए वास्तविक समय के मौसम संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराता है।

मौसम निगरानी में क्यों खास है INSAT-3DR

INSAT-3DR भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की INSAT श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे संचार, प्रसारण, मौसम विज्ञान और खोज एवं बचाव जैसी बहुउद्देशीय जरूरतों के लिए विकसित किया गया है। यह उपग्रह विशेष रूप से परिचालन मौसम विज्ञान के लिए उपयोगी है, क्योंकि यह बादलों, वर्षा प्रणालियों, समुद्री सतह के तापमान और वायुमंडलीय संरचना पर लगातार नजर रखता है।भू-स्थिर कक्षा में होने के कारण यह पृथ्वी की सतह के एक ही क्षेत्र पर स्थिर दिखाई देता है। इसी वजह से मौसम विभाग को एक ही क्षेत्र की बार-बार और नियमित निगरानी करने में सुविधा मिलती है।

कौन-कौन से उपकरण इसे उपयोगी बनाते हैं

INSAT-3DR में 6-चैनल मल्टी-स्पेक्ट्रल इमेजर, 19-चैनल एटमॉस्फेरिक साउंडर, डेटा रिले ट्रांसपोंडर और सर्च एंड रेस्क्यू ट्रांसपोंडर लगे हैं। इमेजर हर आधे घंटे में भारतीय क्षेत्र की बहु-वर्णीय तस्वीरें उपलब्ध कराता है, जबकि साउंडर वायुमंडल की ऊर्ध्वाधर संरचना को मापता है।इस उपग्रह की इमेजिंग प्रणाली में मिडिल इन्फ्रारेड क्षमता भी है, जिससे रात के समय कम ऊंचाई वाले बादल और कोहरे की पहचान संभव होती है। थर्मल इन्फ्रारेड बैंड समुद्र की सतह के तापमान का अनुमान लगाने में मदद करते हैं।

पूर्वानुमान, चक्रवात और मानसून में उपयोग

INSAT-3DR के आंकड़े भारत मौसम विज्ञान विभाग और अन्य परिचालन उपयोगकर्ताओं को लगातार मिलते हैं। इनसे अबॉव-नाउकास्टिंग यानी बहुत कम अवधि के मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात की निगरानी, वर्षा आकलन और मानसूनी बादल पट्टियों के विश्लेषण में मदद मिलती है।मानसून के दौरान पश्चिमी भारत, पूर्वी भारत, गुजरात, दक्षिण राजस्थान और उत्तर-पश्चिम महाराष्ट्र के ऊपर बनने वाली बादल प्रणालियों पर इसकी तस्वीरों से विशेष नजर रखी जाती है। INSAT-3D के साउंडर पेलोड के सितंबर 2020 में सेवा समाप्त करने के बाद INSAT-3DR INSAT-3 श्रृंखला में घंटेवार वायुमंडलीय साउंडर डेटा का प्रमुख स्रोत बन गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • INSAT-3DR को 8 सितंबर 2016 को GSLV-F05 से प्रक्षेपित किया गया था।
  • यह भू-स्थिर कक्षा में स्थित है, जो पृथ्वी से लगभग 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर होती है।
  • इसमें 19-चैनल एटमॉस्फेरिक साउंडर और सर्च एंड रेस्क्यू ट्रांसपोंडर दोनों मौजूद हैं।
  • यह भारतीय क्षेत्र के लिए हर 30 मिनट में बहु-वर्णीय मौसम चित्र उपलब्ध कराता है।

मौसम पूर्वानुमान की सटीकता, चक्रवात चेतावनी और आपदा प्रबंधन की तैयारी में INSAT-3DR जैसे उपग्रहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत की मौसम निगरानी क्षमता को मजबूत करने में यह उपग्रह आज भी एक केंद्रीय कड़ी बना हुआ है।

Originally written on July 27, 2026 and last modified on July 27, 2026.

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