गोमती नदी में मिली नई झींगा प्रजाति, जलीय जैव विविधता को मिला नया संकेत
उत्तर प्रदेश की गोमती नदी में ताजे पानी की एक नई झींगा प्रजाति कारिडिना शर्मा (Caridina sharmai) की पहचान की गई है। यह खोज 27 जुलाई 2026 को लखनऊ में गोमती नदी के ऊपरी हिस्से से दर्ज की गई। इस प्रजाति के मिलने से गोमती बेसिन की जलीय जैव विविधता के बारे में नई जानकारी सामने आई है और नदी पारिस्थितिकी के अध्ययन को भी नया आधार मिला है।
कैसी है यह नई प्रजाति
कारिडिना शर्मा अटीडी (Atyidae) परिवार के अंतर्गत आने वाली ताजे पानी की झींगा प्रजाति है। कारिडिना वंश की यह प्रजाति नदी के ऊपरी प्रवाह क्षेत्र में समूहों में देखी गई। इसका शरीर लगभग 15 से 24 मिलीमीटर लंबा होता है। रंग गहरा भूरा या काला है, जिस पर पीली-धूसर धारियाँ पाई जाती हैं। यह रंग-रूप नदी की तलहटी के वातावरण से मेल खाता है, जिससे यह अपने परिवेश में आसानी से घुल-मिल जाती है।
नामकरण और वैज्ञानिक महत्व
इस प्रजाति का नाम शर्माई प्रसिद्ध प्राणीशास्त्री और क्रस्टेशियन अध्ययन के अग्रणी माने जाने वाले प्रोफेसर यू.डी. शर्मा के सम्मान में रखा गया है। कारिडिना वंश ताजे पानी के झींगों का एक महत्वपूर्ण समूह है, जबकि अटीडी परिवार के सदस्य नदियों और धाराओं में पाए जाने वाले डेकापोड क्रस्टेशियन होते हैं। ऐसे जीवों का अध्ययन नदी के स्वास्थ्य, प्रजातियों के फैलाव और स्थानीय जैव विविधता के दस्तावेजीकरण के लिए उपयोगी माना जाता है।
गोमती नदी और पारिस्थितिकी से जुड़ा महत्व
गोमती नदी गंगा की एक सहायक नदी है और उत्तर प्रदेश से होकर बहती है। लखनऊ क्षेत्र में इससे पहले अटीडी परिवार का कोई झींगा दर्ज नहीं था, इसलिए यह खोज विशेष मानी जा रही है। यह प्रजाति पानी में मौजूद वनस्पतियों से चिपककर रहती है और जल में मौजूद सूक्ष्म कणों को छानकर भोजन ग्रहण करती है। यह व्यवहार कई ताजे पानी के झींगों में सामान्य रूप से देखा जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गोमती नदी, गंगा की एक सहायक नदी है और उत्तर प्रदेश में बहती है।
- कारिडिना शर्मा, कारिडिना वंश की ताजे पानी की झींगा प्रजाति है।
- अटीडी (Atyidae) परिवार के झींगे नदियों और धाराओं में पाए जाने वाले डेकापोड क्रस्टेशियन होते हैं।
- यह लखनऊ क्षेत्र की गोमती नदी से दर्ज की गई पहली अटीडी झींगा प्रजाति है।
इस खोज से गोमती नदी की जैव विविधता सूची में एक नया नाम जुड़ गया है। साथ ही, यह संकेत भी मिलता है कि नदी के ऊपरी हिस्सों में अब भी ऐसे जीव मौजूद हैं जिनका वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण होना बाकी है।