IARC की नई वर्गीकरण रिपोर्ट: तीन आम दवाओं पर कैंसर-जोखिम का संकेत
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी IARC ने तीन दवाओं—हाइड्रोक्लोरोथायजाइड, वोरिकोनाजोल और टैक्रोलिमस—को मनुष्यों के लिए कैंसरकारी यानी Group 1 श्रेणी में रखा है। ये दवाएं उच्च रक्तचाप, गंभीर फंगल संक्रमण और अंग प्रत्यारोपण के बाद अस्वीकृति रोकने के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती हैं।
IARC की वर्गीकरण प्रणाली क्या बताती है
IARC का मोनोग्राफ कार्यक्रम 1970 में शुरू हुआ था और इसका उद्देश्य यह समझना है कि कोई एजेंट किन परिस्थितियों में कैंसर का कारण बन सकता है। Group 1 का अर्थ है कि मनुष्यों में कैंसरकारी प्रभाव के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हैं। हालांकि यह वर्गीकरण किसी मरीज के लिए वास्तविक जोखिम का सीधा माप नहीं होता, बल्कि संभावित कैंसरकारी खतरे की पहचान करता है।
किन दवाओं को क्यों शामिल किया गया
हाइड्रोक्लोरोथायजाइड एक थायजाइड डाययूरेटिक है, जिसे उच्च रक्तचाप के इलाज में पहली पंक्ति की दवा माना जाता है। इसके साथ त्वचा के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और होंठ के कैंसर के बीच संबंध की रिपोर्टें सामने आई हैं, साथ ही यह पराबैंगनी किरणों के प्रति त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ा सकती है। वोरिकोनाजोल गंभीर फंगल संक्रमणों में दी जाती है और इसे Group 1 में कैंसरकारी खतरे की पहचान के आधार पर रखा गया है। टैक्रोलिमस एक इम्यूनोसप्रेसेंट है, जिसका उपयोग किडनी, लिवर और हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद अंग अस्वीकृति रोकने के लिए किया जाता है। इसे नॉन-हॉजकिन लिंफोमा और पोस्ट-ट्रांसप्लांट लिम्फोप्रोलिफेरेटिव डिसऑर्डर से जोड़ा गया है।
मरीजों और डॉक्टरों के लिए इसका अर्थ
इन दवाओं का WHO की मॉडल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स में शामिल होना यह दिखाता है कि ये कई जरूरी स्वास्थ्य स्थितियों में महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज बंद नहीं करना चाहिए। IARC की यह श्रेणीकरण चेतावनी जरूर है, लेकिन यह हर मरीज में समान जोखिम का संकेत नहीं देती; वास्तविक निर्णय बीमारी, खुराक, अवधि और मरीज की स्थिति देखकर ही लिया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IARC, WHO की कैंसर अनुसंधान एजेंसी है और इसका मोनोग्राफ कार्यक्रम 1970 में शुरू हुआ था।
- Group 1 का अर्थ है: मनुष्यों के लिए कैंसरकारी होने के पर्याप्त प्रमाण।
- हाइड्रोक्लोरोथायजाइड का उपयोग आमतौर पर उच्च रक्तचाप के इलाज में होता है।
- टैक्रोलिमस प्रत्यारोपण के बाद अंग अस्वीकृति रोकने के लिए दी जाती है, जबकि वोरिकोनाजोल गंभीर फंगल संक्रमणों में काम आती है।
यह फैसला दवाओं के उपयोग पर तुरंत रोक लगाने का संकेत नहीं है, बल्कि उनके संभावित दीर्घकालिक जोखिमों को समझने और चिकित्सकीय निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करता है।