आईसीएआर की नई जीनोम उपलब्धि से अरहर सुधार को मिली रफ्तार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अरहर की किस्म ‘आशा’ का भारत का पहला पूरी तरह एनोटेटेड टेलोमियर-टू-टेलोमियर (T2T) संदर्भ जीनोम विकसित किया है। यह उपलब्धि फसल जीनोमिक्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि इससे अरहर की आनुवंशिक संरचना को अधिक सटीकता से समझने और बेहतर किस्में विकसित करने में मदद मिलेगी।
अरहर के जीनोम में क्या खास है
इस जीनोम असेंबली को NIPB_CcT2T_4 नाम दिया गया है और इसे 20 अप्रैल 2026 को जारी किया गया। यह नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) डेटाबेस में GCF_000230855.1 एक्सेशन नंबर के साथ उपलब्ध है। ‘आशा’ अरहर जीनोम में 752.65 मिलियन बेस पेयर, 92 कॉन्टिग, 11 क्रोमोसोम, 11 सेंट्रोमीयर और 22 टेलोमीयर शामिल हैं।T2T जीनोम का अर्थ है ऐसा पूर्ण क्रोमोसोम-स्तरीय डीएनए अनुक्रम, जो एक टेलोमीयर से शुरू होकर दूसरे टेलोमीयर तक बिना बड़े अंतराल के जाता है। इससे पहले कई जीनोम असेंबली में कुछ हिस्से अधूरे रह जाते थे, लेकिन T2T तकनीक से यह कमी काफी हद तक दूर होती है।
एनोटेशन से शोध को कैसे मिलेगा लाभ
जीनोम एनोटेशन का मतलब डीएनए अनुक्रम में मौजूद जीनों और उनके कार्यात्मक तत्वों की पहचान करना है। आईसीएआर द्वारा जारी इस एनोटेटेड जीनोम में 36,557 जीन और 48,008 mRNAs दर्ज किए गए हैं। इसके साथ 99.9% से अधिक रीड अलाइनमेंट दर्ज किया गया, जो इसकी उच्च सटीकता को दर्शाता है।यह जानकारी पौध प्रजनकों और जैव-तकनीकी शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी होगी, क्योंकि इससे रोग-प्रतिरोध, जलवायु-सहनशीलता, उपज और दाने की गुणवत्ता से जुड़े जीनों की पहचान आसान हो सकती है। भारत जैसे देश में, जहां दलहन उत्पादन और मांग के बीच अंतर बना रहता है, ऐसी जीनोमिक प्रगति रणनीतिक महत्व रखती है।
दलहन अनुसंधान में भारत की स्थिति
आईसीएआर के अंतर्गत नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी ने 2011 में किसी दलहन फसल का दुनिया का पहला ड्राफ्ट जीनोम प्रकाशित किया था और 2017 में उसका उन्नत संस्करण जारी किया गया था। इससे स्पष्ट है कि भारत दलहन जीनोमिक्स के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है।अरहर, जिसे रेड ग्राम या तुअर भी कहा जाता है, भारत की प्रमुख दलहन फसलों में शामिल है। यह फैबेसी कुल की लेग्यूम फसल है और इसके बीज प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। सरकार की आत्मनिर्भरता in Pulses पहल का लक्ष्य 2030-31 तक लगभग 35 मिलियन टन दलहन उत्पादन हासिल करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अरहर को तुअर या रेड ग्राम भी कहा जाता है और यह भारत की प्रमुख दलहन फसलों में शामिल है।
- T2T जीनोम का मतलब है टेलोमीयर से टेलोमीयर तक पूरा क्रोमोसोम-स्तरीय डीएनए अनुक्रम।
- NCBI जैविक अनुक्रम डेटा का एक वैश्विक भंडार है, जहां शोध डेटा संरक्षित और साझा किया जाता है।
- आत्मनिर्भरता in Pulses पहल का लक्ष्य 2030-31 तक भारत का दलहन उत्पादन लगभग 35 मिलियन टन तक पहुंचाना है।
यह उपलब्धि अरहर की उन्नत, अधिक उपज देने वाली और जलवायु-लचीली किस्मों के विकास की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करती है। दलहन आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को देखते हुए यह शोध भारत की कृषि विज्ञान क्षमता को और मजबूत करता है।