400 वर्ष पुराने पूर्णनकुप्पम कृषि तालाब का हुआ कायाकल्प, पुडुचेरी में जल संरक्षण को मिली नई दिशा
पुडुचेरी के पूर्णनकुप्पम गांव में स्थित लगभग 400 वर्ष पुराने पूर्णनकुप्पम कृषि तालाब, जिसे मुझियानकुलम के नाम से भी जाना जाता है, का व्यापक पुनरुद्धार कार्य पूरा किया गया है। लगभग 1.5 एकड़ क्षेत्र में फैले इस पारंपरिक जलाशय का नवीनीकरण जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से ऐतिहासिक जल स्रोत को आधुनिक सुविधाओं के साथ संरक्षित किया गया है, जिससे स्थानीय समुदाय और कृषि दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
पूर्णनकुप्पम कृषि तालाब का ऐतिहासिक महत्व
पूर्णनकुप्पम कृषि तालाब पुडुचेरी के पारंपरिक ग्रामीण जल स्रोतों में से एक है। यह तालाब कई सदियों से वर्षा जल के संचयन, सिंचाई और स्थानीय जल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। समय के साथ इसमें गाद जमा होने और संरचनात्मक क्षति के कारण इसकी जल धारण क्षमता प्रभावित हो गई थी। तालाब के संरक्षण और पुनरुद्धार का कार्य धना सुंदराम्बल चैरिटेबल सोसाइटी द्वारा अरियानकुप्पम कम्यून पंचायत की अनुमति से कराया गया। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक जल संरचनाओं को पुनर्जीवित कर जल संकट की चुनौतियों का समाधान करना है।
नवीनीकरण कार्य की प्रमुख विशेषताएँ
तालाब के पुनरुद्धार के दौरान सबसे पहले डीसिल्टिंग (गाद हटाने) का कार्य किया गया, जिससे जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि हुई। इसके अलावा किनारों को मजबूत बनाने के लिए रेवेटमेंट का निर्माण किया गया, जिससे कटाव को रोका जा सके। तालाब के चारों ओर पैदल चलने के लिए वॉकवे बनाए गए हैं, जिससे यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए भी उपयोगी बन गया है। जल के बेहतर प्रवाह और प्रबंधन के लिए आधुनिक इनलेट और आउटलेट सिस्टम भी विकसित किए गए हैं। इस संपूर्ण परियोजना पर लगभग 1.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
पुडुचेरी में जलाशयों के संरक्षण की व्यापक योजना
पूर्णनकुप्पम तालाब का पुनरुद्धार पुडुचेरी सरकार की व्यापक जल संरक्षण रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार ने प्रदेश के 82 जलाशयों के पुनरुद्धार के लिए लगभग 480 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है। इस परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। योजना का उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना तथा जल संसाधनों का सतत प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
जल संरक्षण का बढ़ता महत्व
भारत में बढ़ती जल मांग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए पारंपरिक तालाबों और जलाशयों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे जल स्रोत न केवल वर्षा जल का संचयन करते हैं, बल्कि भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय कृषि को भी समर्थन प्रदान करते हैं। पूर्णनकुप्पम कृषि तालाब का पुनरुद्धार यह दर्शाता है कि ऐतिहासिक जल संरचनाओं को आधुनिक तकनीकों के साथ पुनर्जीवित कर भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पूर्णनकुप्पम कृषि तालाब (मुझियानकुलम) लगभग 400 वर्ष पुराना पारंपरिक जलाशय है।
- यह तालाब 1.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
- इसके पुनरुद्धार कार्य पर लगभग 1.2 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
- पुडुचेरी सरकार ने 82 जलाशयों के पुनरुद्धार के लिए लगभग 480 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है।
पूर्णनकुप्पम कृषि तालाब का सफल पुनरुद्धार पारंपरिक जल संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह पहल न केवल जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य में सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास के लिए भी एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आएगी।