2030 तक 100 करोड़ 5G यूजर का लक्ष्य, भारत की डिजिटल रफ्तार तेज
भारत ने 2030 तक 100 करोड़ लोगों को 5G तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। 1 अक्टूबर 2022 को 5G सेवाओं की शुरुआत के बाद देश ने बहुत कम समय में नेटवर्क विस्तार की तेज रफ्तार दिखाई है। अब यह तकनीक लगभग सभी जिलों तक पहुंच चुकी है और मोबाइल कनेक्टिविटी के अगले चरण की आधारशिला बन गई है।
5G विस्तार ने बदली डिजिटल कनेक्टिविटी की तस्वीर
5G, मोबाइल संचार की पांचवीं पीढ़ी की तकनीक है, जो 4G की तुलना में अधिक डेटा स्पीड, कम लेटेंसी और ज्यादा नेटवर्क क्षमता देती है। भारत में 5G सेवाएं शुरू होने के करीब ढाई साल के भीतर लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंच गईं। यह गति बताती है कि देश में डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन कामकाज, स्ट्रीमिंग, स्मार्ट डिवाइस और औद्योगिक कनेक्टिविटी के लिए 5G कितनी तेजी से अपनाई जा रही है।सरकारी और उद्योग स्तर पर यह विस्तार बड़े निवेश और मजबूत दूरसंचार ढांचे के कारण संभव हुआ। 5G रोलआउट में लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ और करीब पांच लाख टेलीकॉम टावर लगाए गए। इससे देश के दूर-दराज इलाकों तक नेटवर्क पहुंचाने में मदद मिली।
नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और कवरेज का दायरा
28 फरवरी 2025 तक भारत के 99.6% जिलों में 5G सेवाएं उपलब्ध हो चुकी थीं। इसी तारीख तक 4.69 लाख 5G बेस ट्रांससीवर स्टेशन सक्रिय थे। बेस ट्रांससीवर स्टेशन वह रेडियो उपकरण होता है, जो मोबाइल डिवाइस को नेटवर्क से जोड़ता है। यह आंकड़ा दिखाता है कि 5G अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा व्यापक होता जा रहा है।दूरसंचार सचिव नीरज मित्तल ने 25 मार्च 2025 को कहा कि भारत में 2030 तक 1 अरब 5G सब्सक्राइबर होने की संभावना है। यह कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का लगभग 74% होगा। एरिक्सन ने भी भारत में 2030 तक 97 करोड़ 5G उपभोक्ताओं का अनुमान जताया है, जो मोबाइल ग्राहक आधार का लगभग 74% हिस्सा होगा।
अब फोकस 6G और अगली पीढ़ी की तकनीक पर
5G के तेज विस्तार के बाद भारत की दूरसंचार नीति का ध्यान अब 6G अनुसंधान और उसके भविष्य के उपयोगों पर केंद्रित हो रहा है। 6G, 5G के बाद आने वाली अगली वायरलेस संचार तकनीक होगी। इसका उद्देश्य और अधिक तेज, अधिक भरोसेमंद और अधिक उन्नत कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में 5G सेवाओं की शुरुआत 1 अक्टूबर 2022 को हुई थी।
- 5G का पूरा नाम पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक है।
- 28 फरवरी 2025 तक 5G सेवाएं भारत के 99.6% जिलों में उपलब्ध थीं।
- बेस ट्रांससीवर स्टेशन मोबाइल नेटवर्क से डिवाइस को जोड़ने वाला रेडियो उपकरण होता है।
तेजी से बढ़ता 5G नेटवर्क भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, संचार व्यवस्था और भविष्य की 6G तैयारी—तीनों के लिए महत्वपूर्ण आधार बन रहा है।