अंतरिक्ष मलबे और रि-एंट्री पर भारत के नए नियम
भारत ने अंतरिक्ष यानों और उनके अवशेषों के पृथ्वी के वायुमंडल में नियोजित पुनःप्रवेश यानी प्लान्ड रि-एंट्री के लिए नया नियामकीय ढांचा जारी किया है। इन नियमों के तहत भारतीय और विदेशी, दोनों तरह के ऑपरेटरों पर स्पष्ट अनुमति, सुरक्षा और देयता संबंधी शर्तें लागू होंगी।
नियोजित रि-एंट्री के लिए अब अनुमति अनिवार्य
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र यानी IN-SPACe ने 23 जुलाई 2026 को “Norms, Guidelines and Procedures for Authorisation for Undertaking Planned Re-entry of Space Objects” जारी किए। यह ढांचा 29–30 जुलाई 2026 को सार्वजनिक किया गया। इसके अनुसार, किसी भी भारतीय इकाई को नियोजित रि-एंट्री करने से पहले IN-SPACe की पूर्व अनुमति लेनी होगी, चाहे यह गतिविधि भारत के भीतर हो या बाहर।विदेशी इकाइयों के लिए भी व्यवस्था स्पष्ट की गई है। यदि वे भारत के भीतर नियोजित रि-एंट्री करना चाहती हैं, तो उन्हें आवेदन किसी भारतीय-निगमित इकाई के माध्यम से करना होगा। वही इकाई भारतीय कानूनों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों के पालन की जिम्मेदार होगी।
देयता, बीमा और जोखिम पर सख्त प्रावधान
नए नियमों की सबसे अहम बात यह है कि रि-एंट्री करने वाले निजी ऑपरेटरों पर पूरी देयता होगी। यदि पुनःप्रवेश के दौरान किसी तरह का नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी ऑपरेटर की मानी जाएगी। इसी कारण पर्याप्त बीमा कवरेज अनिवार्य किया गया है, जिसमें थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस भी शामिल है।नियोजित रि-एंट्री मिशनों में मानव हानि का जोखिम 1 in 10,000 से कम रखना होगा। इसके साथ ही आवेदकों को अंतरिक्ष यान की तकनीकी विशेषताएं, मिशन के उद्देश्य, डी-ऑर्बिट रणनीति, संभावित प्रभाव क्षेत्र और जोखिम आकलन से जुड़े दस्तावेज भी जमा करने होंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मिशन केवल तकनीकी रूप से नहीं, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी नियंत्रित हो।
अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन को भी मिली नियामकीय दिशा
नए ढांचे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो अंतरिक्ष यान अपनी मिशन अवधि पूरी होने के बाद सामान्य प्रक्रिया के तहत वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और पूरी तरह जलकर नष्ट हो जाते हैं, उन्हें अलग से रि-एंट्री अनुमति की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उनकी निपटान योजना को फिर भी अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण रणनीति का हिस्सा बनाना होगा।यह व्यवस्था भारत की Indian Space Policy 2023 के कार्यान्वयन का हिस्सा है। नीति का उद्देश्य निजी भागीदारी को बढ़ावा देना है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियां सुरक्षित, जवाबदेह और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IN-SPACe भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए वैधानिक प्राधिकरण निकाय है और यह Department of Space के तहत काम करता है।
- अंतरिक्ष कानून में थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस एक सामान्य नियामकीय उपकरण है, ताकि पृथ्वी पर होने वाले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जा सके।
- आधुनिक उपग्रह लाइसेंसिंग और मिशन स्वीकृति प्रणालियों में space debris mitigation यानी अंतरिक्ष मलबा न्यूनीकरण योजना अनिवार्य मानी जाती है।
- Indian Space Policy 2023 निजी क्षेत्र को लॉन्च, उपग्रह और डाउनस्ट्रीम स्पेस गतिविधियों में भागीदारी का आधार देती है।
कुल मिलाकर, यह कदम भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी के साथ सुरक्षा, जवाबदेही और मलबा प्रबंधन को एक मजबूत कानूनी ढांचे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।