तिब्बत में ड्रोन परीक्षण केंद्र से चीन की ऊंचाई वाली तकनीक को बढ़त

तिब्बत में ड्रोन परीक्षण केंद्र से चीन की ऊंचाई वाली तकनीक को बढ़त

चीन ने तिब्बत में ऊंचाई वाले इलाकों के लिए ड्रोन परीक्षण और अनुसंधान ढांचे को मजबूत करना शुरू किया है। 2025 और 2026 में पश्चिमी तिब्बत के नगारी में एक परीक्षण आधार और माउंट एवरेस्ट के पास शिज़ांग विश्वविद्यालय में एक विशेष ड्रोन अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया। ये दोनों सुविधाएं ऐसे भूभाग में हैं, जहां कम ऑक्सीजन, बेहद ठंड, ऊबड़-खाबड़ जमीन और तेजी से बदलता मौसम ड्रोन की क्षमता की असली परीक्षा लेते हैं।

नगारी में बना ऊंचाई वाला परीक्षण आधार

28 सितंबर 2025 को नगारी में हाई-एल्टीट्यूड अनमैन्ड इक्विपमेंट टेस्टिंग बेस का उद्घाटन किया गया। यह स्थल 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है और यहां पतली हवा तथा ठंडी हवाओं में मानव रहित विमानों का परीक्षण किया जाता है। 29 अक्टूबर 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों में इस परिसर में 720 मीटर लंबा रनवे और कई हैंगर दिखाई दिए, जिससे इसके बुनियादी ढांचे का आकार और उपयोगिता स्पष्ट होती है। नगारी का चयन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह तिब्बत के सबसे कठिन इलाकों में से एक है। यहां ड्रोन को सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कम लिफ्ट, कम बैटरी दक्षता और कम उड़ान अवधि जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे परीक्षण भविष्य में अधिक सक्षम ड्रोन डिजाइन करने में मदद कर सकते हैं।

एवरेस्ट के पास अनुसंधान और उपयोग का नया केंद्र

3 जुलाई 2026 को शिज़ांग विश्वविद्यालय में प्लेटो ड्रोन आरएंडडी एप्लिकेशन सेंटर शुरू किया गया। इसे चीन का पहला ऐसा पेशेवर मंच बताया गया है, जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ड्रोन अनुसंधान के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर केंद्रित है। इस केंद्र का संबंध सीमा गश्त, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और परिवहन जैसे कार्यों से जोड़ा गया है। तिब्बती पठार को दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन विमानन परीक्षण क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां की परिस्थितियां ड्रोन के लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ तकनीकी विकास के लिए उपयोगी भी हैं, क्योंकि वास्तविक ऊंचाई वाले वातावरण में परीक्षण से उपकरणों की सीमाएं और सुधार की जरूरतें बेहतर समझी जा सकती हैं।

रणनीतिक महत्व और नीति से जुड़ा संदर्भ

तिब्बत में ड्रोन ढांचे का विस्तार केवल तकनीकी प्रयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक और क्षेत्रीय विकास से भी जुड़ा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग नागरिक परिवहन, आपूर्ति पहुंचाने, निगरानी और आपदा-प्रबंधन जैसे कार्यों में किया जा सकता है। साथ ही, ऐसे प्लेटफॉर्म दोहरे उपयोग वाली तकनीकों के विकास में भी भूमिका निभा सकते हैं, जिनका उपयोग नागरिक और सुरक्षा दोनों जरूरतों में संभव होता है। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की लो-एल्टीट्यूड इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान (2025–2030) के तहत 2030 तक एक क्षेत्रीय यूएवी सेवा नेटवर्क बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना में नगारी को ड्रोन संचालन के लिए केंद्रीय परीक्षण और डिस्पैच केंद्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तिब्बती पठार को अक्सर “Roof of the World” कहा जाता है, क्योंकि इसके बड़े हिस्से 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर हैं।
  • यूएवी (Unmanned Aerial Vehicle) को सामान्य भाषा में ड्रोन कहा जाता है।
  • ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने से विमान और ड्रोन की लिफ्ट, पेलोड और उड़ान अवधि प्रभावित होती है।
  • नगारी पश्चिमी तिब्बत का एक अत्यधिक ऊंचाई वाला क्षेत्र है और वहां मानव रहित विमानन परीक्षण के लिए कठिन परिस्थितियां मिलती हैं।

तिब्बत में इन सुविधाओं की स्थापना से साफ है कि ऊंचाई वाले वातावरण में ड्रोन तकनीक को परखने और उसे वास्तविक उपयोग के लिए तैयार करने पर चीन का फोकस बढ़ा है। यह कदम भविष्य में पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष ड्रोन प्रणालियों के विकास की दिशा तय कर सकता है।

Originally written on July 30, 2026 and last modified on July 30, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *