राजस्थान से दुर्लभ मृदा खनिजों की खोज को नई दिशा
राजस्थान दुर्लभ मृदा तत्वों की खोज के लिए अन्वेषण लाइसेंस लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। 29 जुलाई 2026 को जारी यह लाइसेंस पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा जिले के नवतला-देवीगढ़ (पचपदरा) क्षेत्र और जोधपुर जिले की शेरगढ़ तहसील में फैले 207.63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है।
क्या है यह अन्वेषण लाइसेंस
अन्वेषण लाइसेंस खनिज निकालने की अनुमति नहीं होता, बल्कि यह किसी क्षेत्र में खनिजों की मौजूदगी, उनकी मात्रा और भूगर्भीय स्थिति की जांच के लिए दी जाने वाली कानूनी स्वीकृति है। राजस्थान में यह लाइसेंस सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड को दिया गया और समझौते पर राज्य के खान एवं भूविज्ञान विभाग ने हस्ताक्षर किए। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि दुर्लभ मृदा तत्वों को आधुनिक उद्योगों और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इनके बिना कई उन्नत तकनीकी उपकरणों का निर्माण कठिन हो जाता है।
दुर्लभ मृदा तत्व क्यों महत्वपूर्ण हैं
दुर्लभ मृदा तत्व 17 रासायनिक रूप से मिलते-जुलते धात्विक तत्वों का समूह हैं। इनमें 15 लैंथेनाइड्स के साथ स्कैंडियम और इट्रियम शामिल हैं। राजस्थान ब्लॉक में लैंथेनम, सेरियम, प्रेजोडाइमियम और नियोडाइमियम जैसे तत्वों की पहचान की गई है। इनका उपयोग चुंबक, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और रक्षा प्रौद्योगिकी में होता है। यही कारण है कि इन्हें केवल औद्योगिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत के नए क्रिटिकल मिनरल्स ढांचे में राजस्थान की भूमिका
राजस्थान का यह लाइसेंस भारत के अद्यतन क्रिटिकल मिनरल्स नियामकीय ढांचे के तहत हस्ताक्षरित पहला अन्वेषण लाइसेंस समझौता है। केंद्र सरकार ने 2024 में क्रिटिकल और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी शुरू की थी, जिसके बाद 2025 में अन्वेषण लाइसेंस की पहली चरण की नीलामी आगे बढ़ी। इस विकास से संकेत मिलता है कि भारत अब उन खनिजों की खोज पर अधिक ध्यान दे रहा है, जिनकी आपूर्ति और उपलब्धता औद्योगिक आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है। पश्चिमी राजस्थान का यह क्षेत्र अब इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भू-वैज्ञानिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- दुर्लभ मृदा तत्व 17 धात्विक तत्वों का समूह हैं, जिनमें 15 लैंथेनाइड्स, स्कैंडियम और इट्रियम शामिल हैं।
- भारत में कई खनिजों को उनकी औद्योगिक और सुरक्षा उपयोगिता के कारण क्रिटिकल और रणनीतिक श्रेणी में रखा गया है।
- बालोतरा और जोधपुर, दोनों जिले पश्चिमी राजस्थान में स्थित हैं।
- सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड कोयला और खनन क्षेत्र का सार्वजनिक उपक्रम है।
राजस्थान में यह पहल न केवल खनिज अन्वेषण के नए अवसर खोलती है, बल्कि देश की दुर्लभ मृदा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।