हरियाणा ने शुरू की ऑटो म्यूटेशन और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 प्रणाली
हरियाणा सरकार ने 23 जून 2026 को भूमि अभिलेखों और संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और डिजिटल बनाने के उद्देश्य से ऑटो म्यूटेशन सिस्टम तथा पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 की शुरुआत की। इस नई व्यवस्था के तहत संपत्ति पंजीकरण और म्यूटेशन प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ा गया है, जिससे नागरिकों को अलग से म्यूटेशन के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह पहल डिजिटल प्रशासन और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
म्यूटेशन क्या होता है?
म्यूटेशन भूमि या संपत्ति के स्वामित्व में परिवर्तन होने के बाद राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया संपत्ति की बिक्री, विरासत, विभाजन या अन्य प्रकार के हस्तांतरण के बाद की जाती है। भारत में म्यूटेशन प्रविष्टियां राज्य राजस्व विभागों द्वारा भूमि राजस्व प्रशासन और अभिलेखों के रखरखाव के लिए उपयोग की जाती हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि म्यूटेशन स्वयं में स्वामित्व का कानूनी प्रमाण पत्र (Title Deed) नहीं होता, बल्कि यह राजस्व रिकॉर्ड में किए गए परिवर्तन का विवरण होता है।
नई प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं
हरियाणा के नए ऑटो म्यूटेशन सिस्टम के तहत संपत्ति पंजीकरण के बाद अलग से म्यूटेशन आवेदन की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित होगी। इस प्रणाली में आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC), डिजिटल हस्ताक्षर, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और क्यूआर कोड आधारित रिकॉर्ड सत्यापन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। आवेदक अपने मामलों की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं और आवश्यक अतिरिक्त दस्तावेज भी डिजिटल रूप से अपलोड कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, डीटीपी (Department of Town and Country Planning) और विभिन्न अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जैसी विभागीय स्वीकृतियां भी ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त की जा सकेंगी।
तेज होगी निपटान प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत जिन मामलों में संयुक्त स्वामित्व का विभाजन शामिल नहीं है, उन्हें 24 घंटे के भीतर स्वीकृत किया जाएगा। वहीं, जिन मामलों में हिस्सेदारी या संयुक्त स्वामित्व का विभाजन आवश्यक होगा, उनका निपटान अधिकतम 10 दिनों के भीतर किया जाएगा। इससे पहले 29 सितंबर 2025 को कुरुक्षेत्र जिले की लाडवा तहसील में पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसकी सफलता के बाद 1 नवंबर 2025 से इसे पूरे हरियाणा में लागू कर दिया गया।
लंबित मामलों में आई बड़ी कमी
नई डिजिटल व्यवस्था के प्रभाव से लंबित म्यूटेशन मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। लगभग छह महीनों के भीतर लंबित मामलों की संख्या पांच लाख से घटकर लगभग 50,000 रह गई। परीक्षण चरण के दौरान ही लगभग 50,000 म्यूटेशन मामलों का स्वतः निपटान किया गया। यह उपलब्धि भूमि अभिलेख प्रबंधन में तकनीक के प्रभावी उपयोग का उदाहरण मानी जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- म्यूटेशन भूमि राजस्व अभिलेखों में स्वामित्व परिवर्तन दर्ज करने की प्रक्रिया है।
- म्यूटेशन रिकॉर्ड स्वयं में स्वामित्व का कानूनी दस्तावेज नहीं होता।
- हरियाणा की नई प्रणाली में आधार आधारित ई-केवाईसी का उपयोग पहचान सत्यापन के लिए किया जाता है।
- भूमि अभिलेखों के ऑनलाइन सत्यापन के लिए क्यूआर कोड तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
- हरियाणा में संपत्ति पंजीकरण के लिए ‘तत्काल अपॉइंटमेंट’ सुविधा भी शुरू की जा रही है।
- पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली का पहला पायलट प्रोजेक्ट 29 सितंबर 2025 को लाडवा तहसील, कुरुक्षेत्र में शुरू किया गया था।
हरियाणा की ऑटो म्यूटेशन और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 पहल भूमि अभिलेख प्रबंधन में डिजिटल परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इससे न केवल नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यकुशलता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। भविष्य में ऐसी प्रणालियां अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में उभर सकती हैं।