राजस्थान के माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए ₹28,000 करोड़ का मेगा ईपीसी टेंडर
भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए अनुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (अश्विनी) जल्द ही राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए लगभग ₹28,000 करोड़ के इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) टेंडर जारी करने जा रहा है। यह टेंडर न्यूक्लियर आइलैंड मेगा ईपीसी पैकेज (नाइमेप) के नाम से जाना जाएगा और इसमें 700 मेगावाट क्षमता वाले चार स्वदेशी प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों का निर्माण शामिल है। इन चारों इकाइयों की कुल स्थापित क्षमता 2,800 मेगावाट होगी। यह भारत के स्वदेशी 700 मेगावाट पीएचडब्ल्यूआर कार्यक्रम का अब तक का सबसे बड़ा न्यूक्लियर आइलैंड ईपीसी पैकेज माना जा रहा है।
अश्विनी और माही बांसवाड़ा परियोजना
अनुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (अश्विनी) न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और एनटीपीसी लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है। इस परियोजना को माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (एमबीआरएपीपी) के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य भारत की स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाना तथा परमाणु ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
न्यूक्लियर आइलैंड मेगा ईपीसी पैकेज का दायरा
इस मेगा पैकेज के अंतर्गत विस्तृत इंजीनियरिंग, उपकरणों का निर्माण एवं आपूर्ति, सिविल निर्माण कार्य, विभिन्न प्रणालियों की स्थापना, परीक्षण तथा कमीशनिंग सहायता जैसे सभी प्रमुख कार्य शामिल होंगे। यह पैकेज परमाणु ऊर्जा संयंत्र के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी न्यूक्लियर आइलैंड के विकास से संबंधित है, जहां रिएक्टर और उससे जुड़े मुख्य सुरक्षा तंत्र स्थापित किए जाते हैं।
प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर कार्यक्रम का महत्व
माही बांसवाड़ा परियोजना भारत के स्वदेशी 700 मेगावाट प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) कार्यक्रम का हिस्सा है। इस प्रकार के रिएक्टर में भारी जल (हेवी वाटर) का उपयोग मॉडरेटर और कूलेंट दोनों के रूप में किया जाता है। भारत लंबे समय से इसी तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग अपने घरेलू परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में करता रहा है, जिससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होती है और स्वदेशी विशेषज्ञता को बढ़ावा मिलता है।
भारत के परमाणु ऊर्जा लक्ष्य
माही बांसवाड़ा परियोजना की अनुमानित कुल लागत लगभग ₹50,000 करोड़ है। परियोजना की चारों इकाइयों से 2,800 मेगावाट अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा क्षमता जुड़ेगी। भारत ने वर्ष 2032 तक 22 गीगावाट तथा वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह परियोजना इन राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मार्च 2026 में परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने माही बांसवाड़ा परियोजना की पहली दो इकाइयों के लिए खुदाई गतिविधियों की अनुमति प्रदान की थी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2025 को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।
- परियोजना में 700 मेगावाट क्षमता वाले चार प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर लगाए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 2,800 मेगावाट होगी।
- भारत का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है।
माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक रणनीतिक निवेश है, जो स्वदेशी परमाणु तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगा। परियोजना के पूरा होने पर यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की बढ़ती बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम को गति देगी।