मेघालय में मिली नई मशरूम प्रजाति ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की रुचि
मेघालय से मशरूम की एक नई प्रजाति Russula griseopurpurata का वैज्ञानिक वर्णन किया गया है। यह खोज भारत की फफूंद विविधता को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इस प्रजाति की पहचान केवल बाहरी बनावट से नहीं, बल्कि डीएनए विश्लेषण और सूक्ष्म अध्ययन के आधार पर की गई है।
कहां और कैसे मिली यह प्रजाति
इस नई प्रजाति का होलोटाइप नमूना 22 जुलाई 2022 को मेघालय के री भोई जिले के जिरांग क्षेत्र में शोरिया रोबस्टा यानी साल के पेड़ के नीचे मिला था। यह नमूना समुद्र तल से लगभग 320 मीटर की ऊंचाई पर एकत्र किया गया। बाद में इस प्रजाति पर विस्तृत अध्ययन किया गया, जिसमें मेघालय और पश्चिम बंगाल से मिले कुल तीन नमूनों को शामिल किया गया।
मेघालय वाला नमूना संग्रह संख्या GUBH 20331 और अनुक्रम PQ432811 के तहत दर्ज किया गया। शोधकर्ताओं ने इसकी पहचान के लिए ITS DNA sequencing और phylogenetic analysis का उपयोग किया, जिससे इसे Russula वंश की अन्य निकटवर्ती प्रजातियों से अलग पहचाना जा सका।
Russula वंश की वैज्ञानिक अहमियत
Russula मशरूमों का एक बड़ा वंश है, जिसमें दुनिया भर में लगभग 2,000 प्रजातियां शामिल मानी जाती हैं। इस वंश की कई प्रजातियों की खास पहचान उनका भंगुर गूदा और रंगीन टोपी होती है। नई प्रजाति Russula subsect. Cyanoxanthinae के भीतर रखी गई है, जो इसके वर्गीकरण को और स्पष्ट करती है।
इस मशरूम की टोपी धूसर-बैंगनी रंग की होती है और उम्र बढ़ने पर उसमें दरारें पड़ सकती हैं। इसकी गलफड़ों में डंठल के पास शाखाएं भी दिखाई देती हैं। इन्हीं बाहरी लक्षणों और आणविक आंकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने इसे एक अलग प्रजाति के रूप में स्थापित किया।
फफूंद वर्गीकरण में आधुनिक तकनीक की भूमिका
भारत में फफूंदों की पहचान अब केवल आकार, रंग और बनावट तक सीमित नहीं रही। वैज्ञानिक अब क्षेत्रीय अवलोकन, सूक्ष्म संरचनाओं और डीएनए-आधारित तरीकों को साथ लेकर नई प्रजातियों का वर्णन करते हैं। यही कारण है कि इस तरह की खोजें जैव विविधता अध्ययन, पारिस्थितिकी और वर्गिकी विज्ञान के लिए उपयोगी मानी जाती हैं।
यह शोध Phytotaxa नामक वैज्ञानिक पत्रिका में 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ। यह पत्रिका पौधों और फफूंदों की वर्गिकी से जुड़े शोध प्रकाशित करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- होलोटाइप किसी नई प्रजाति के नामकरण के लिए उपयोग किया जाने वाला एकमात्र नाम-निर्धारक नमूना होता है।
- ITS का पूरा नाम Internal Transcribed Spacer है, जो फफूंदों की पहचान में एक मानक DNA marker माना जाता है।
- Shorea robusta को आमतौर पर साल कहा जाता है और यह भारतीय उपमहाद्वीप का प्रमुख वृक्ष है।
- Phytotaxa पौधों और फफूंदों की taxonomy पर केंद्रित एक वैज्ञानिक पत्रिका है।
Russula griseopurpurata की खोज यह दिखाती है कि भारत के जंगलों में अब भी कई ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनकी वैज्ञानिक पहचान बाकी है। ऐसी खोजें देश की जैव विविधता को दर्ज करने और उसके संरक्षण की दिशा में अहम भूमिका निभाती हैं।