भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया पहनने योग्य स्व-ऊर्जित अमोनिया सेंसर

भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया पहनने योग्य स्व-ऊर्जित अमोनिया सेंसर

भारत के वैज्ञानिकों ने 14 जुलाई 2026 को एक पोर्टेबल, स्व-ऊर्जित और पहनने योग्य अमोनिया सेंसर विकसित कर बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। इस अत्याधुनिक उपकरण का विकास बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस) में किया गया, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है। यह सेंसर हवा में केवल 319 पार्ट्स पर बिलियन (पीपीबी) जैसी अत्यंत कम मात्रा में भी अमोनिया गैस की पहचान करने में सक्षम है। यह तकनीक औद्योगिक सुरक्षा, पर्यावरण निगरानी और पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

अमोनिया गैस और उसका महत्व

अमोनिया एक रंगहीन गैस है जिसका रासायनिक सूत्र एनएच₃ (NH₃) है। इसका व्यापक उपयोग उर्वरक निर्माण, रेफ्रिजरेशन, रासायनिक उद्योग तथा कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। हालांकि, अधिक मात्रा में अमोनिया के संपर्क में आने से आंखों, त्वचा और श्वसन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इसकी समय रहते पहचान करना औद्योगिक और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सेंसर कैसे करता है कार्य?

इस नए सेंसर में वैनेडियम ऑक्साइड–वैनेडियम सल्फाइड (VOx/VS₂) हेटरोस्ट्रक्चर का उपयोग किया गया है। हेटरोस्ट्रक्चर दो अलग-अलग अर्धचालक या कार्यात्मक परतों को जोड़कर बनाई गई विशेष संरचना होती है, जिसका उपयोग आधुनिक सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है। इस सेंसर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सामान्य कमरे के तापमान (लगभग 20 से 25 डिग्री सेल्सियस) पर कार्य करता है। इसके विपरीत, अधिकांश पारंपरिक गैस सेंसरों को अधिक तापमान और अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे यह नया उपकरण अधिक ऊर्जा-कुशल और व्यावहारिक बन जाता है।

पहनने योग्य और लचीली तकनीक

वैज्ञानिकों ने इस सेंसर को पॉलिमर, कागज और वस्त्र (टेक्सटाइल) जैसे लचीले आधारों पर भी तैयार किया है। इससे यह उपकरण मुड़ने, मोड़ने या ट्विस्ट होने पर भी प्रभावी ढंग से कार्य करता है। यही विशेषता इसे पहनने योग्य इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उपयुक्त बनाती है। इसके संभावित उपयोगों में स्मार्ट बैंड, स्मार्ट होम चेतावनी प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वस्त्र (ई-टेक्सटाइल) शामिल हैं। इसके साथ विकसित पोर्टेबल मॉनिटरिंग सिस्टम अमोनिया के स्तर को सुरक्षित, चेतावनी और खतरे की श्रेणियों में वर्गीकृत कर तुरंत अलर्ट भी प्रदान करता है।

अनुसंधान दल और प्रमुख विशेषताएं

इस शोध का नेतृत्व प्रोफेसर अंगप्पाने सुब्रमणियन ने किया। अनुसंधान दल में डॉ. विष्णु जी. नाथ, अंकुर वर्मा, अभिजीत पॉल और डॉ. सुभाष चेरुमन्निल करुमुथिल शामिल थे। यह सेंसर अन्य सामान्य गैसों की तुलना में अमोनिया की सटीक पहचान करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, यह बार-बार उपयोग के बाद भी स्थिर प्रदर्शन देता है और दस सप्ताह से अधिक समय तक विश्वसनीय रूप से कार्य करने में सक्षम पाया गया है। इस शोध को सेंसर प्रौद्योगिकी के प्रतिष्ठित सहकर्मी-समीक्षित शोध पत्रिका एसीएस सेंसर्स में प्रकाशित किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस), बेंगलुरु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है।
  • पार्ट्स पर बिलियन (पीपीबी) गैसों और प्रदूषकों की अत्यंत कम सांद्रता मापने की इकाई है।
  • गैस सेंसरों के प्रमुख प्रकारों में सेमीकंडक्टर मेटल-ऑक्साइड, इलेक्ट्रोकेमिकल, ऑप्टिकल और नैनोमैटेरियल आधारित सेंसर शामिल हैं।
  • पहनने योग्य सेंसरों का उपयोग व्यक्तिगत सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी, औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरणीय निगरानी में तेजी से बढ़ रहा है।

यह नई तकनीक भारत की नैनोविज्ञान और सेंसर प्रौद्योगिकी में बढ़ती क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। कम ऊर्जा खपत, उच्च संवेदनशीलता और पहनने योग्य डिजाइन जैसी विशेषताओं के कारण यह उपकरण भविष्य में उद्योगों, कृषि, प्रयोगशालाओं और घरेलू सुरक्षा प्रणालियों में व्यापक उपयोग की संभावनाएं रखता है।

Originally written on July 15, 2026 and last modified on July 15, 2026.

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