भारत ने लॉन्च की ‘सीफेयरर-फर्स्ट’ आपातकालीन समुद्री सुरक्षा योजना
भारत सरकार ने 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘सीफेयरर-फर्स्ट’ आपातकालीन समुद्री सुरक्षा योजना की घोषणा की। यह निर्णय होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारी जहाज एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा पर हुए हमलों के बाद लिया गया। यह योजना फारस की खाड़ी, होरमुज़ जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में कार्यरत भारतीय नाविकों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करेगी। इसमें रियल-टाइम निगरानी, परिवारों के साथ समन्वय और आपातकालीन सहायता जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
समुद्री सुरक्षा की पृष्ठभूमि
होरमुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। क्षेत्रीय तनाव के समय इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों को अक्सर सुरक्षा संबंधी चेतावनियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में एमटी अल बहियाह और एमटी मोम्बासा पर हुए हमलों में भारतीय नाविक रोहन कुमार की मृत्यु हो गई। वहीं एमटी मोम्बासा पर सवार नौ चालक दल के सदस्य घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर थी। एमटी अल बहियाह पर भी एक चालक दल का सदस्य घायल हुआ। इन घटनाओं ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
‘सीफेयरर-फर्स्ट’ योजना की प्रमुख विशेषताएं
इस नई योजना के अंतर्गत नौवहन महानिदेशालय (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग) उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों की निगरानी के लिए रियल-टाइम ऑपरेशनल डैशबोर्ड संचालित करेगा। प्रभावित परिवारों के लिए विशेष संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, जो एकल संपर्क बिंदु के रूप में सहायता प्रदान करेंगे। इसके साथ ही नाविकों और उनके परिवारों के लिए 24×7 हेल्पलाइन भी शुरू की गई है। ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराएंगे। इसके अतिरिक्त, प्रभावित क्षेत्र से गुजरने वाले प्रत्येक जहाज के लिए यात्रा से पहले नए सुरक्षा जोखिम का मूल्यांकन अनिवार्य किया गया है। जहाज मालिकों, पोत प्रबंधकों और भर्ती एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी भारतीय नाविक पर्याप्त सुरक्षा जानकारी और सहायता के बिना यात्रा पर न जाए।
नौवहन महानिदेशालय की भूमिका
नौवहन महानिदेशालय भारत सरकार के बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह भारत में व्यापारी जहाजों के संचालन, समुद्री सुरक्षा और नाविकों के कल्याण से जुड़े नियमों का नियमन करता है। 10 अप्रैल 2026 को महानिदेशालय ने परिपत्र संख्या 21/2026 जारी कर मध्य-पूर्व में कार्यरत भारतीय नाविकों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश दिए थे। इसमें भूमि पर मौजूद नाविकों को घर के भीतर रहने तथा जहाजों पर कार्यरत कर्मचारियों को ईरानी जलक्षेत्र के आसपास तनावग्रस्त क्षेत्रों में तट पर जाने से बचने की सलाह दी गई थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहल
भारत ने व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के समक्ष भी उठाया है। साथ ही, वर्ष 2028–29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के अपने अभियान में समुद्री सुरक्षा को एक प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया है। इससे वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- होरमुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल एवं समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
- नौवहन महानिदेशालय (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग) भारत का समुद्री नियामक निकाय है, जो बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- व्यापारी जहाज (मर्चेंट वेसल) वाणिज्यिक जहाज होते हैं, जिनका उपयोग माल परिवहन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए किया जाता है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य शामिल होते हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव दो वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।
‘सीफेयरर-फर्स्ट’ आपातकालीन समुद्री सुरक्षा योजना भारतीय नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना संकटग्रस्त समुद्री क्षेत्रों में बेहतर निगरानी, त्वरित सहायता, पारिवारिक समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारतीय नाविकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को भी और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।