पूर्वोत्तर में मिली तीन नई कैस्केड मेंढक प्रजातियाँ, भारत की जैव विविधता को नई पहचान

पूर्वोत्तर में मिली तीन नई कैस्केड मेंढक प्रजातियाँ, भारत की जैव विविधता को नई पहचान

पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल से कैस्केड मेंढकों की तीन नई प्रजातियों की पहचान की गई है। यह खोज भारत की उभयचर विविधता को और समृद्ध करती है तथा हिमालयी और वन-आधारित जलधाराओं में पाए जाने वाले जीवों के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कैस्केड मेंढक क्या होते हैं

कैस्केड मेंढक Amolops वंश से संबंधित होते हैं, जिन्हें आम तौर पर कैस्केड फ्रॉग या टोरेंट फ्रॉग भी कहा जाता है। ये ऐसे मेंढक हैं जो तेज बहाव वाली वन-नदियों, पहाड़ी धाराओं, चट्टानी जलमार्गों और नम जंगलों में रहने के लिए अनुकूलित होते हैं। पूर्वी हिमालय और उससे लगे क्षेत्रों में इनका प्राकृतिक आवास विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

नई प्रजातियों की पहचान कहाँ से हुई

अध्ययन में तीन नई प्रजातियों को दर्ज किया गया है—अम्माची कैस्केड फ्रॉग (Amolops ammachi), सेंडेन्यू कैस्केड फ्रॉग (Amolops sendenyu) और ब्यूटीफुल कैस्केड फ्रॉग (Amolops bella)। Amolops ammachi त्रिपुरा के जंपुई हिल्स से मिली और इसका नाम केरल की सामाजिक कार्यकर्ता व परोपकारी पadmini Varkey, जिन्हें अम्माची के नाम से जाना जाता है, के सम्मान में रखा गया। Amolops sendenyu नागालैंड से दर्ज की गई और इसका नाम सेंडेन्यू गाँव पर आधारित है। Amolops bella पश्चिम बंगाल से मिली, जिसका शरीर हरा है और उस पर पीले-हरे या लाल-भूरे मोज़ेक जैसे पैटर्न पाए गए।

अध्ययन की वैज्ञानिक पद्धति

यह शोध दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रो. एस. डी. बिजू के नेतृत्व में किया गया और 12 अगस्त 2026 को Bulletin of the Museum of Comparative Zoology में प्रकाशित हुआ। प्रजातियों की पहचान के लिए डीएनए विश्लेषण, वयस्क मेंढकों और टैडपोल की संरचनात्मक तुलना, तथा क्षेत्रीय सर्वेक्षणों का सहारा लिया गया। शोध में कैस्केड मेंढकों की 300 से अधिक भौगोलिक आबादियों का अध्ययन किया गया, जो निकट संबंधी उभयचर प्रजातियों को अलग पहचानने की मानक वैज्ञानिक प्रक्रिया मानी जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Amolops वंश के मेंढक तेज बहाव वाली पहाड़ी धाराओं में रहने के लिए अनुकूलित होते हैं।
  • उभयचर वे कशेरुकी जीव हैं जिनकी त्वचा सामान्यतः नम होती है और जिनका जीवन-चक्र टैडपोल से वयस्क अवस्था तक बदलता है।
  • त्रिपुरा, नागालैंड और पश्चिम बंगाल भारत के ऐसे राज्य हैं जहाँ वन, पहाड़ी और जलधारा-आधारित आवास उभयचर विविधता के लिए अनुकूल हैं।
  • डीएनए विश्लेषण और रूपात्मक तुलना आधुनिक टैक्सोनॉमी में प्रजाति पहचान के प्रमुख उपकरण हैं।

भारत में वितरण का दायरा और महत्व

शोधकर्ताओं ने भारत में कैस्केड मेंढकों की पाँच प्रजातियों को पहली बार दर्ज भी किया है—Amolops afghanus, Amolops nepalicus, Amolops wangyali, Amolops medogensis और Amolops bellulus। इससे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में इस वंश के वितरण को समझने में मदद मिलती है। ऐसी खोजें न केवल जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में उपयोगी हैं, बल्कि वन्य आवासों के संरक्षण और प्रजातियों की सही पहचान के लिए भी अहम हैं।

यह खोज बताती है कि भारत के पूर्वोत्तर और पूर्वी हिमालयी क्षेत्र अभी भी कई दुर्लभ और कम-अध्ययनित प्रजातियों का घर हैं। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और डीएनए-आधारित अध्ययन से देश की प्राकृतिक विरासत के बारे में नई जानकारियाँ लगातार सामने आ रही हैं।

Originally written on August 12, 2026 and last modified on August 12, 2026.

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