सीमा क्षेत्रों में रणनीतिक अवसंरचना को मिलेगी नई मजबूती, रक्षा मंत्री ने बताई बीआरओ की अहम भूमिका
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि तकनीक आधारित आधुनिक युद्ध के दौर में सीमा क्षेत्रों का रणनीतिक अवसंरचना विकास अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि सड़कें, सुरंगें, हवाई पट्टियां, बंदरगाह और अन्य संपर्क सुविधाएं भविष्य के सैन्य अभियानों की सफलता में केंद्रीय भूमिका निभाएंगी। सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) क्या है?
बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की स्थापना वर्ष 1960 में सीमावर्ती और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सड़क निर्माण के उद्देश्य से की गई थी। यह संगठन रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। बीआरओ का मुख्य कार्य दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में सड़कें, पुल, सुरंगें तथा अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचना का निर्माण और रखरखाव करना है। पिछले छह दशकों से अधिक समय में संगठन ने देश की सामरिक क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रणनीतिक अवसंरचना का महत्व
रणनीतिक अवसंरचना से आशय उन परिवहन और सहायता सुविधाओं से है, जो रक्षा बलों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाती हैं। बेहतर सड़कें और सुरंगें सैनिकों की त्वरित तैनाती, आवश्यक सामग्री की आपूर्ति और अग्रिम चौकियों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करती हैं। वहीं हवाई पट्टियां और बंदरगाह वायु एवं समुद्री परिवहन को मजबूत बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करते हैं। आधुनिक युद्ध में तेज़ और सुरक्षित कनेक्टिविटी को एक महत्वपूर्ण सामरिक शक्ति माना जाता है।
बीआरओ की प्रमुख परियोजनाएं
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने बीआरओ द्वारा निर्मित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उल्लेख किया। इनमें हिमाचल प्रदेश का अटल टनल, लद्दाख में स्थित उमलिंग ला दर्रा सड़क तथा अरुणाचल प्रदेश का सेला टनल प्रमुख हैं। अटल टनल विश्व की सबसे लंबी उच्च ऊंचाई वाली सड़क सुरंगों में से एक मानी जाती है। वहीं उमलिंग ला सड़क दुनिया के सबसे ऊंचे मोटर योग्य मार्गों में शामिल है। सेला टनल पूर्वोत्तर भारत में वर्षभर संपर्क बनाए रखने और रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सीमा क्षेत्रों का समग्र विकास
सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल संपर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। इसी उद्देश्य से वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत हिमालयी और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों का समग्र विकास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों को देश के अंतिम नहीं, बल्कि पहले गांव के रूप में विकसित करना है, ताकि वहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें और सीमावर्ती क्षेत्रों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास तेज़ हो।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला प्रमुख निर्माण संगठन है।
- बीआरओ की स्थापना वर्ष 1960 में सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़क निर्माण के लिए की गई थी।
- अटल टनल विश्व की सबसे लंबी उच्च ऊंचाई वाली सड़क सुरंगों में से एक है और यह हिमाचल प्रदेश में स्थित है।
- वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में आधारभूत सुविधाओं, कनेक्टिविटी और आजीविका के अवसरों का विकास करना है।
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर उद्योग, शिक्षण संस्थानों, अभियंताओं और प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका मानना है कि आधुनिक रणनीतिक अवसंरचना के विकास में सभी संबंधित संस्थाओं की साझेदारी आवश्यक है। सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत सड़क, सुरंग, पुल, हवाई पट्टियों और संचार नेटवर्क का निर्माण न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि इन क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगा।