स्कूल शिक्षा गुणवत्ता में पंजाब की छलांग, नीतिगत सुधारों का असर दिखा

स्कूल शिक्षा गुणवत्ता में पंजाब की छलांग, नीतिगत सुधारों का असर दिखा

पंजाब ने नीति आयोग की स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक 2026 में पहला स्थान हासिल कर शिक्षा सुधारों के मामले में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। राज्य ने 2020 में 27वें स्थान से सीधे शीर्ष स्थान तक पहुंचकर यह संकेत दिया है कि बुनियादी ढांचे, सीखने के परिणाम, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रमों पर किए गए प्रयासों का असर अब आंकड़ों में दिखने लगा है।

रैंकिंग में पंजाब की तेज़ प्रगति

पंजाब सरकार ने 6 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में विधानसभा में यह जानकारी रखी। राज्य ने केरल जैसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पाया। स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक, यानी SEQI, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्कूल शिक्षा की तुलना के लिए नीति आयोग का एक प्रदर्शन-आधारित ढांचा है। इसमें पहुंच, आधारभूत ढांचा, समानता, प्रशासन, सीखने के परिणाम और शिक्षक-संबंधी मानकों को परखा जाता है।

राज्य के अनुसार, कक्षा 3 के भाषा कौशल में 82 प्रतिशत और गणित में 78 प्रतिशत दक्षता दर्ज की गई। यह सुधार केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राथमिक स्तर पर सीखने की गुणवत्ता में बदलाव का संकेत भी देता है।

बुनियादी ढांचे और सीखने के माहौल में सुधार

पंजाब ने 19,125 स्कूलों में आधारभूत ढांचे को उन्नत किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस पर 2,638 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि कुछ स्थानीय प्रकाशनों में इसी कार्य के लिए 3,638 करोड़ रुपये का उल्लेख भी किया गया। जुलाई 2022 के एक आधारभूत सर्वेक्षण में सामने आया था कि 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 स्कूलों में कार्यशील शौचालय नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ते थे।

नई व्यवस्था के तहत राज्य ने स्मार्ट कक्षाओं का दायरा भी बढ़ाया है और ताज़ा मानकों में 80 प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धि बताई गई है। इससे डिजिटल शिक्षण और कक्षा-आधारित सीखने दोनों को मजबूती मिली है।

शैक्षणिक सहयोग और नई पहलें

राज्य ने शैक्षणिक सहायता के लिए पंजाब अकैडमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस यानी PACE पहल को आगे बढ़ाया है। इसके तहत 2026 में 882 सरकारी स्कूल विद्यार्थियों ने NEET-UG में सफलता हासिल की, जबकि 2021 में यह संख्या 80 थी। यह वृद्धि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सरकारी स्कूलों में बेहतर तैयारी और मार्गदर्शन की ओर इशारा करती है।

पंजाब ने कक्षा 1 से 12 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कोर विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनने का दावा भी किया है। इसके साथ ही पाठ्यपुस्तक वितरण की समय-सीमा बदली गई है, ताकि किताबें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाएं और 31 मार्च तक पूरी वितरण प्रक्रिया पूरी हो सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नीति आयोग की स्थापना 2015 में भारत सरकार के नीति-निर्माण थिंक टैंक के रूप में की गई थी।
  • SEQI राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्कूल शिक्षा के प्रदर्शन की तुलना करने वाला सूचकांक है।
  • मिशन समर्थ एक स्तर-आधारित प्रारंभिक साक्षरता और गणना कार्यक्रम है, जिसमें छात्रों को सीखने की क्षमता के आधार पर समूहित किया जाता है।
  • पंजाब ने मिशन समर्थ के तहत लगभग 12 लाख छात्रों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर करने की बात कही है।

पंजाब की यह उपलब्धि बताती है कि शिक्षा सुधार केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि स्कूलों की वास्तविक जरूरतों, शिक्षक-समर्थन और सीखने की निगरानी से परिणाम देते हैं। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी संदर्भ बिंदु बन सकता है।

Originally written on August 7, 2026 and last modified on August 7, 2026.

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