महेश काकड़े को रामानुजन पुरस्कार, भारतीय गणित को वैश्विक पहचान
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के प्रोफेसर महेश काकड़े को बीजगणितीय संख्या सिद्धांत में उनके योगदान के लिए रामानुजन पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। सैद्धांतिक भौतिकी के अंतरराष्ट्रीय केंद्र और अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ ने 30 सितंबर 2026 को पुरस्कार की घोषणा की, जबकि आईआईएससी ने 7 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। यह सम्मान विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों के शोध और कठिन परिस्थितियों में उनके काम को पहचान देता है।
विकासशील देशों के गणितज्ञों के लिए प्रतिष्ठित सम्मान
‘विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों के लिए रामानुजन पुरस्कार’ वर्ष 2005 से हर साल दिया जा रहा है। इसका संचालन सैद्धांतिक भौतिकी का अंतरराष्ट्रीय केंद्र और अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ संयुक्त रूप से करते हैं। पुरस्कार के अंतर्गत 10,000 अमेरिकी डॉलर की राशि दी जाती है। इसके लिए विकासशील देश के 45 वर्ष से कम आयु के ऐसे शोधकर्ता पर विचार किया जाता है, जिसने विकासशील देश में कठिन परिस्थितियों के बीच उत्कृष्ट शोध किया हो। दोनों संस्थाओं के परामर्श से गणितज्ञों की एक समिति विजेता का चयन करती है।
इस पुरस्कार का नाम भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के सम्मान में रखा गया है। रामानुजन ने संख्या सिद्धांत और गणित के अन्य क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इस सम्मान की खासियत यह है कि यह केवल शोध की उपलब्धि को नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को भी ध्यान में रखता है जिनमें शोधकर्ता ने अपना काम किया।
काकड़े का शोध और शैक्षणिक सफर
महेश काकड़े का शोध बीजगणितीय संख्या सिद्धांत से जुड़ा है। इसमें संख्याओं और उनके सामान्यीकरणों का अध्ययन क्षेत्र तथा समूह जैसी गणितीय संरचनाओं के माध्यम से किया जाता है। उनके प्रमुख कार्यों में गैर-परिवर्तनीय इवासावा सिद्धांत के मूलभूत परिणाम और ग्रॉस-स्टार्क तथा ब्रूमर-स्टार्क अनुमानों पर शोध शामिल हैं। उनके शोध का संबंध हिल्बर्ट की 12वीं समस्या से भी है। यह 23 गणितीय समस्याओं में से एक है, जिन्हें जर्मन गणितज्ञ डेविड हिल्बर्ट ने 1900 में प्रस्तुत किया था। काकड़े के योगदान को इस समस्या से जुड़े गणितीय अध्ययन के संदर्भ में देखा जाता है।
काकड़े ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान से गणित में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से गणित में स्नातकोत्तर उपाधि और शुद्ध गणित में पीएचडी प्राप्त की; उनकी डॉक्टरेट 2008 में पूरी हुई। वे 2019 में आईआईएससी में प्रोफेसर बने। इससे पहले उन्हें 2022 में गणितीय विज्ञान के लिए इन्फोसिस पुरस्कार मिला था और 2023 में एशियन साइंटिस्ट की 100 प्रभावशाली वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया था।
पुरस्कार का व्यापक महत्व
काकड़े को मिला सम्मान भारत में उच्चस्तरीय गणितीय शोध की वैश्विक पहचान को रेखांकित करता है। संख्या सिद्धांत जैसे विषयों में प्रगति के लिए लंबे समय तक चलने वाला सैद्धांतिक शोध और मजबूत शैक्षणिक वातावरण आवश्यक होता है। यह पुरस्कार ऐसे शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान देता है, जिनका काम गणित की बुनियादी समस्याओं और सिद्धांतों को आगे बढ़ाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- श्रीनिवास रामानुजन का जीवनकाल 1887 से 1920 तक था।
- अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ गणित के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने वाला संगठन है।
- भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना 1931 में कोलकाता में पी. सी. महालनोबिस ने की थी।
- डेविड हिल्बर्ट ने 1900 में पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गणितज्ञ सम्मेलन में अपनी 23 समस्याएँ प्रस्तुत की थीं।
रामानुजन पुरस्कार 2026 से महेश काकड़े के शोध को अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है और भारतीय गणित समुदाय की उपलब्धि को नई पहचान मिली है।