तेजस एमके-1ए की रफ्तार बढ़ाने में इंजन आपूर्ति अहम

तेजस एमके-1ए की रफ्तार बढ़ाने में इंजन आपूर्ति अहम

जीई एयरोस्पेस ने 7 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसने सितंबर में हल्के लड़ाकू विमान एलसीए एमके-1ए कार्यक्रम के लिए चार एफ404-आईएन20 इंजन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को भेजे। इसके साथ एचएएल को मिल चुके इंजनों की संख्या 14 हो गई है। विमान की उत्पादन गति और वायुसेना को इसकी आपूर्ति, दोनों के लिए समय पर इंजन मिलना महत्वपूर्ण है।

इंजन आपूर्ति और उत्पादन की समयसीमा

जीई एयरोस्पेस और एचएएल के बीच 2021 में 99 एफ404-आईएन20 इंजनों की आपूर्ति के लिए 5,375 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था। सितंबर में भेजे गए चार इंजनों से पहले कंपनी अगस्त 2026 में तीन इंजन दे चुकी थी। जीई ने जून से दिसंबर 2026 के बीच कुल 20 इंजन देने का भरोसा दिया है और 2027 से हर वर्ष 20 से अधिक इंजन आपूर्ति करने की अपेक्षा जताई है।

एफ404-आईएन20 एक आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन है। यह एकल-इंजन वाले एलसीए एमके-1ए को शक्ति देता है। आपूर्ति में देरी के चलते एचएएल जीई एयरोस्पेस पर अनुबंध के तहत जुर्माना लगा रही है। इंजन की उपलब्धता में बाधा का असर विमान निर्माण और तय समय पर डिलीवरी पर पड़ सकता है।

वायुसेना के आदेश और तेजस कार्यक्रम

भारतीय वायुसेना ने एलसीए एमके-1ए के लिए दो अनुबंधों के तहत कुल 180 विमानों का आदेश दिया है। फरवरी 2021 में 83 विमानों का पहला अनुबंध हुआ था, जबकि सितंबर 2025 में 97 विमानों के लिए दूसरा अनुबंध किया गया। इन विमानों का उद्देश्य वायुसेना के सेवानिवृत्त मिग-21 लड़ाकू विमानों की जगह लेना है।

एचएएल की उत्पादन इकाइयां बेंगलुरु और नासिक में हैं। इनकी घोषित वार्षिक क्षमता 24 विमान है। पहले अनुबंध के तहत शुरुआती विमान की आपूर्ति मार्च 2024 में होनी थी, लेकिन इंजन आपूर्ति और जरूरी प्रमाणपत्रों में देरी से यह समयसीमा पूरी नहीं हो सकी। अब पहले अनुबंध की डिलीवरी दिसंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है और विमान के उसी वर्ष के अंत तक सेवा में आने की संभावना है।

तेजस का स्वदेशी विकास और भूमिका

एलसीए तेजस भारत में विकसित हल्का, एकल-इंजन और ध्वनि की गति से तेज उड़ान भरने वाला लड़ाकू विमान है। इसके डिजाइन का नेतृत्व रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अंतर्गत आने वाली वैमानिकी विकास एजेंसी ने किया, जबकि निर्माण एचएएल करता है। एमके-1ए, तेजस एमके-1 का उन्नत संस्करण है। इस कार्यक्रम में विमान निर्माण की जिम्मेदारी एचएएल और इंजन आपूर्ति की जिम्मेदारी जीई एयरोस्पेस की है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वैमानिकी विकास एजेंसी, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अंतर्गत कार्य करती है।
  • एचएएल रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की एयरोस्पेस और रक्षा कंपनी है।
  • एलसीए तेजस एकल-इंजन वाला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है।
  • एफ404-आईएन20 आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन जीई एयरोस्पेस बनाती है।

इंजन आपूर्ति की नियमितता एलसीए एमके-1ए की उत्पादन समयसीमा से सीधे जुड़ी है। आने वाले महीनों में डिलीवरी की प्रगति से यह स्पष्ट होगा कि एचएएल विमान निर्माण की निर्धारित गति हासिल कर पाता है या नहीं।

Originally written on October 7, 2026 and last modified on October 7, 2026.

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