गुजरात में मिला दो सिर वाला दुर्लभ गैर-विषैला साँप
गुजरात के दाहोद जिले के धनपुर तालुका स्थित अगस्वानी गांव में 6 अक्टूबर 2026 को दो सिर वाला दुर्लभ भेड़िया साँप मिला। करीब छह इंच लंबे इस गैर-विषैले साँप का एक शरीर, दो सिर और चार आंखें हैं। इसे राज्य में दर्ज किया गया अपनी तरह का पहला मामला बताया गया है।
वन विभाग की निगरानी में साँप
दाहोद प्रकृति मित्र मंडल के सदस्यों ने खेत से साँप को बचाकर वन विभाग को सौंपा। विभाग उसकी देखभाल और निगरानी कर रहा है। अनुमान है कि साँप की उम्र छह महीने से एक वर्ष के बीच है। बताया गया है कि उसके दोनों सिर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं।
यह भारत में दर्ज दो सिर वाले साँपों का पांचवां मामला है और भेड़िया साँप में इस तरह की विकृति का तीसरा दर्ज मामला माना गया है। हालांकि, बचाए गए साँप की सटीक प्रजाति की पहचान की जानकारी सामने नहीं आई है।
दो सिर बनने की वजह और चुनौतियां
दो सिर होने की इस विकास संबंधी असामान्यता को द्विशीर्षता कहा जाता है। इसमें एक ही शरीर पर दो सिर विकसित होते हैं और दोनों के पास सिर से जुड़ी अपनी संरचनाएं होती हैं। साँपों में यह स्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है; इसके लगभग दस लाख में एक बार होने का अनुमान है।
जंगल में ऐसे साँपों का जीवित रहना कठिन हो सकता है। दोनों सिर स्वतंत्र रूप से 움직 सकते हैं और उनकी गतिविधियां एक-दूसरे से टकरा सकती हैं, जिससे दिशा तय करने या शिकार करने में मुश्किल आ सकती है।
भेड़िया साँप का वर्गीकरण
भेड़िया साँप गैर-विषैले होते हैं। इस नाम से पहचानी जाने वाली कई प्रजातियां Lycodon वंश और Colubridae कुल से संबंधित हैं। साँप सरीसृप वर्ग के जीव हैं और शल्कधारी गण में आते हैं; इसी गण में छिपकलियां भी शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- द्विशीर्षता एक विकास संबंधी असामान्यता है, जिसमें एक जीव के दो सिर होते हैं।
- यह साँप गुजरात के दाहोद जिले के धनपुर तालुका के अगस्वानी गांव में मिला।
- भेड़िया साँप की कई प्रजातियां Lycodon वंश और Colubridae कुल में आती हैं।
- साँप शल्कधारी गण के सरीसृप हैं; इस गण में छिपकलियां भी शामिल हैं।
दाहोद में मिला यह मामला दुर्लभ विकासात्मक असामान्यताओं और वन्यजीवों की निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है। वन विभाग की देखरेख में साँप की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।