लद्दाख में हिम तेंदुआ सफारी से संरक्षण और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा
लद्दाख में 7 अक्टूबर 2026 को भारत की पहली उच्च हिमालयी हिम तेंदुआ वन्यजीव सफारी शुरू की गई। लेह में वन्यजीव सप्ताह के दौरान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने छह विशेष खुले-पिछले हिस्से वाले वाहनों को रवाना किया। इस पहल को हिम तेंदुआ एवं उच्च ऊंचाई प्रकृति संरक्षण सोसायटी और लद्दाख के वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग ने मिलकर शुरू किया है।
सफारी के शुरुआती मार्ग और विस्तार योजना
पहले चरण में सफारी के लिए रुम्बक, शांग और उले क्षेत्रों को चुना गया है। इन इलाकों में हिम तेंदुए अक्सर देखे जाते हैं। आगे चलकर मार्गों का विस्तार हेमिस राष्ट्रीय उद्यान, चांगथांग और काराकोरम वन्यजीव अभयारण्य के साथ नुब्रा, जांस्कर, शाम, कारगिल और द्रास तक करने की योजना है।
सफारी में विशेष रूप से तैयार खुले-पिछले हिस्से वाले वाहन इस्तेमाल होंगे। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में पर्यटन को व्यवस्थित ढंग से संचालित करना इस पहल का अहम पहलू है। इससे पर्यटकों को ऊंचाई वाले इलाकों के वन्यजीवों को देखने का अवसर मिल सकता है, जबकि संवेदनशील आवासों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा।
हिम तेंदुए का आवास और संरक्षण का महत्व
हिम तेंदुआ ठंडे और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूल बड़ी बिल्ली प्रजाति है। इसका वैज्ञानिक नाम Panthera uncia है। मध्य और दक्षिण एशिया के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में इसका विस्तार है। भारत में यह लद्दाख के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। पथरीली ढलानें और खड़ी पहाड़ियां इसे आवास तथा छिपने के लिए उपयुक्त जगह देती हैं।
भारत में हिम तेंदुओं की अनुमानित संख्या 718 है, जिनमें से 477 लद्दाख में बताए गए हैं। हेमिस राष्ट्रीय उद्यान लद्दाख का उच्च हिमालयी संरक्षित क्षेत्र है और हिम तेंदुए के आवास का हिस्सा है। चांगथांग और काराकोरम वन्यजीव अभयारण्य भी इस क्षेत्र के ऊंचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हैं। ऐसे इलाकों में संरक्षण के लिए आवास बचाने के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच होने वाले संपर्क का प्रबंधन भी जरूरी है।
समुदाय-आधारित पर्यटन की भूमिका
लद्दाख प्रशासन ने इस सफारी की घोषणा 5 अगस्त 2026 को की थी और दो महीने के भीतर इसे लागू किया। इसके घोषित उद्देश्यों में जिम्मेदार वन्यजीव पर्यटन, समुदाय-आधारित संरक्षण और स्थानीय युवाओं तथा समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ाना शामिल है। पर्यटक सेवाओं और संरक्षण गतिविधियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी से पर्यटन का लाभ क्षेत्र के समुदायों तक पहुंच सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हिम तेंदुए का वैज्ञानिक नाम Panthera uncia है।
- हेमिस राष्ट्रीय उद्यान लद्दाख में स्थित है।
- भारत में वन्यजीव सप्ताह हर वर्ष 2 से 8 अक्टूबर तक मनाया जाता है।
- लद्दाख में हिम तेंदुओं की अनुमानित संख्या 477 है, जबकि देशभर का अनुमान 718 है।
लद्दाख की यह पहल वन्यजीव संरक्षण को स्थानीय आजीविका और जिम्मेदार पर्यटन से जोड़ने का प्रयास है। इसकी सफलता पर्यटन गतिविधियों और हिम तेंदुए के संवेदनशील पर्वतीय आवास के बीच संतुलन बनाए रखने पर निर्भर करेगी।