भारत में केयर सेक्टर को पेशेवर ढांचा देने की तैयारी
नीति आयोग ने 5 अगस्त 2026 को ‘रीइमैजिनिंग केयर: स्ट्रैटेजीज़ फॉर एम्पावरिंग केयरगिवर्स इन विकसित भारत@2047’ रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट भारत में देखभाल सेवाओं को एक संगठित, पेशेवर, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार व्यवस्था के रूप में विकसित करने का खाका पेश करती है। इसमें बुजुर्गों, परिवार के देखभालकर्ताओं, समुदाय-आधारित केयरगिवर्स और वेतनभोगी केयरगिवर्स—सभी को एक व्यापक केयर इकोसिस्टम का हिस्सा माना गया है।
देखभाल को कौशल-आधारित पेशे के रूप में मान्यता
रिपोर्ट का सबसे अहम पक्ष यह है कि देखभाल को केवल घरेलू जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक कुशल और गरिमापूर्ण पेशा माना गया है। भारत में बढ़ती उम्रदराज आबादी और परिवार संरचनाओं में बदलाव के कारण लंबे समय तक देखभाल की जरूरत बढ़ रही है। ऐसे में रिपोर्ट का जोर इस बात पर है कि केयर सेवाओं को प्रशिक्षित मानव संसाधन, मानकीकृत प्रक्रियाओं और स्पष्ट पेशेवर पहचान के साथ आगे बढ़ाया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, देखभाल सेवाओं की मांग केवल अस्पतालों या संस्थागत सेटिंग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि घर, समुदाय और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं में भी इसका विस्तार होगा। इसी वजह से कौशल, प्रमाणन और सेवा-गुणवत्ता को केंद्र में रखा गया है।
राष्ट्रीय ढांचे से सेवा-गुणवत्ता और नियमन पर जोर
रिपोर्ट में राष्ट्रीय केयरगिविंग काउंसिल (NCC) गठित करने की सिफारिश की गई है, जो देशभर में देखभाल सेवाओं के नियमन, मानक-निर्धारण और पेशेवरकरण की दिशा में काम करेगी। यह परिषद प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मान्यता देने और देखभाल सेवाओं के लिए राष्ट्रीय मानक तय करने में भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही राष्ट्रीय केयरगिविंग क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि शिक्षा, प्रशिक्षण, मान्यता और प्रमाणन की एक समान व्यवस्था बन सके। रिपोर्ट में राष्ट्रीय केयरगिवर रजिस्ट्री और एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की भी बात की गई है, जिससे कार्यबल की योजना, उपलब्धता और सेवा-प्रदान को बेहतर बनाया जा सके।
बुजुर्ग आबादी, सामाजिक सुरक्षा और केयर इकोनॉमी
रिपोर्ट में भारत की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी को दीर्घकालिक देखभाल नीति का प्रमुख आधार बताया गया है। इसमें अनुमान है कि 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी 2022 के 149 मिलियन से बढ़कर 2050 तक 347 मिलियन हो सकती है। इसी अवधि में बुजुर्ग आबादी का अनुपात 10.5% से बढ़कर 20.8% तक पहुंचने का अनुमान है। इसी संदर्भ में रिपोर्ट सामाजिक सुरक्षा, कल्याणकारी उपायों और केयरगिवर्स के लिए उद्यमिता समर्थन बढ़ाने की बात करती है। परिवार और समुदाय स्तर पर देखभाल करने वालों के लिए प्रशिक्षण और परामर्श सहायता को भी जरूरी माना गया है। रिपोर्ट भारत को वैश्विक केयर इकोनॉमी से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय मांग, साझेदारी और कुशल केयरगिवर्स की गतिशीलता की संभावनाओं का भी उल्लेख करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नीति आयोग की स्थापना 2015 में योजना आयोग के स्थान पर की गई थी।
- ‘विकसित भारत@2047’ भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने से जुड़ा दीर्घकालिक राष्ट्रीय विजन है।
- रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 60+ आबादी 2022 में 149 मिलियन थी, जो 2050 तक 347 मिलियन तक पहुंच सकती है।
- इसी अवधि में बुजुर्ग आबादी का हिस्सा 10.5% से बढ़कर 20.8% होने का अनुमान है।
यह रिपोर्ट संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में भारत को देखभाल सेवाओं के लिए केवल परंपरागत पारिवारिक ढांचे पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि एक प्रशिक्षित, मानकीकृत और संस्थागत केयर सिस्टम तैयार करना होगा।