स्काईरूट एयरोस्पेस बना भारत का पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को बड़ी उपलब्धि मिली है। हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस 7 मई 2026 को भारत का पहला स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन गया। कंपनी ने लगभग 6 करोड़ डॉलर की नई फंडिंग जुटाई, जिसके बाद उसका मूल्यांकन 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह उपलब्धि भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किन निवेशकों ने किया निवेश
इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व शेरपालो वेंचर्स और सिंगापुर के संप्रभु संपत्ति कोष जीआईसी ने संयुक्त रूप से किया। शेरपालो वेंचर्स की स्थापना भारतीय मूल के उद्यमी राम श्रीराम ने की थी। इसके अलावा ग्रीनको समूह के संस्थापक, अरकम वेंचर्स, ब्लैकरॉक द्वारा प्रबंधित फंड, प्लेबुक पार्टनर्स और संघवी फैमिली ऑफिस ने भी निवेश किया।
विक्रम-1 रॉकेट पर कंपनी का फोकस
स्काईरूट एयरोस्पेस का प्रमुख प्रोजेक्ट विक्रम-1 ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। यह रॉकेट पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों को स्थापित करने के लिए विकसित किया जा रहा है। कंपनी नई पूंजी का उपयोग विक्रम-1 के प्रक्षेपण, विनिर्माण क्षमता विस्तार, तकनीकी विकास और टीम विस्तार में करेगी। 29 अप्रैल 2026 तक यह रॉकेट अंतिम एकीकरण और परीक्षण चरण में पहुंच चुका था।
श्रीहरिकोटा से होगा प्रक्षेपण
विक्रम-1 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित भारत के अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा। कंपनी ने 24 अप्रैल 2026 को इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिकल टेस्ट कैंपेन के तीसरे चरण को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस परीक्षण में रॉकेट, ग्राउंड सॉफ्टवेयर और विद्युत इंटरफेस को एकीकृत प्रणाली के रूप में जांचा गया।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नया दौर
स्काईरूट एयरोस्पेस भारत का पहला निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप है जिसने अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला निजी रॉकेट विकसित किया। वर्ष 2022 में कंपनी ने विक्रम-एस लॉन्च किया था, जो अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला निजी रॉकेट बना। अब विक्रम-1 के जरिए कंपनी भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
भारत में स्पेस-टेक उद्योग का विस्तार
हाल के वर्षों में भारत ने निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में भागीदारी की अनुमति दी है। इससे स्पेस-टेक स्टार्टअप तेजी से उभरे हैं। इसरो के सहयोग और सरकारी नीतियों के समर्थन से भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूनिकॉर्न उस निजी स्टार्टअप को कहा जाता है जिसका मूल्यांकन 1 अरब डॉलर या उससे अधिक हो।
- जीआईसी सिंगापुर का संप्रभु संपत्ति कोष है।
- श्रीहरिकोटा भारत का प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र है।
- विक्रम-एस वर्ष 2022 में अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला भारत का पहला निजी रॉकेट बना था।
स्काईरूट एयरोस्पेस का यूनिकॉर्न बनना भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे देश में स्पेस-टेक नवाचार, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई गति मिलने की उम्मीद है।