नासा ने चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाने की तीन-चरणीय योजना दोहराई

नासा ने चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाने की तीन-चरणीय योजना दोहराई

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 24 मार्च 2026 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थायी “मून बेस” स्थापित करने की तीन-चरणीय योजना की घोषणा की थी, जिसे 27 मई 2026 को फिर से दोहराया गया। यह परियोजना नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना और भविष्य में मंगल मिशनों की तैयारी करना है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले सात वर्षों में लगभग 20 अरब डॉलर खर्च किए जाने का अनुमान है। नासा का मानना है कि चंद्रमा पर स्थायी आधार बनने से अंतरिक्ष अनुसंधान, संसाधन उपयोग और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए नई संभावनाएँ खुलेंगी।

आर्टेमिस कार्यक्रम और चंद्र दक्षिणी ध्रुव

आर्टेमिस कार्यक्रम नासा का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य अंतरिक्ष यात्रियों को पुनः चंद्रमा पर भेजना और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए आधार तैयार करना है। इस योजना में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को विशेष महत्व दिया गया है। दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में स्थायी रूप से छाया में रहने वाले क्रेटर मौजूद हैं, जहाँ जल-बर्फ मिलने की संभावना है। यही कारण है कि यह क्षेत्र वैज्ञानिक अनुसंधान और भविष्य के संसाधन उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

पहला चरण: रोबोटिक मिशन और कार्गो डिलीवरी

योजना का पहला चरण वर्ष 2029 तक चलेगा। इसमें रोबोटिक मिशन, कार्गो डिलीवरी और चंद्र सतह पर नई तकनीकों का परीक्षण शामिल है। नासा इस चरण में लगभग 25 मिशन और 21 चंद्र लैंडिंग की योजना बना रहा है। इसके साथ ही कमर्शियल लूनर पेलोड सर्विसेज (CLPS) कार्यक्रम का विस्तार और लूनर टेरेन व्हीकल कार्यक्रम को भी बढ़ावा दिया जाएगा। “मून बेस-I” मिशन का प्रक्षेपण 2026 की शरद ऋतु से पहले नहीं होने की संभावना है। इसमें ब्लू ओरिजिन का “ब्लू मून मार्क 1 एंड्योरेंस” लैंडर उपयोग किया जाएगा। यह मिशन शैकलटन कनेक्टिंग रिज क्षेत्र में उपकरण पहुँचाएगा, जिससे भविष्य के मानवयुक्त आर्टेमिस मिशनों के लिए जोखिम कम करने में सहायता मिलेगी।

दूसरा और तीसरा चरण

योजना का दूसरा चरण 2029 से 2032 तक चलेगा। इसमें प्रारंभिक अर्ध-आवासीय ढाँचे तैयार किए जाएंगे। इसके अंतर्गत ऊर्जा ग्रिड, सतही संचार प्रणाली और गतिशीलता प्रणालियों का विकास होगा, ताकि अंतरिक्ष यात्री कई सप्ताह या महीनों तक चंद्रमा पर कार्य कर सकें। तीसरा चरण 2036 तक जारी रहेगा और इसका उद्देश्य स्थायी चंद्र बेस स्थापित करना है। नासा ने हर छह महीने में मानवयुक्त लैंडिंग और चंद्रमा पर निरंतर मानव उपस्थिति बनाए रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

कार्यक्रम लागत और अंतरिक्ष नीति

मून बेस परियोजना पर लगभग 20 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। वहीं नासा के ऑफिस ऑफ इंस्पेक्टर जनरल के अनुसार 2012 से 2025 के बीच व्यापक आर्टेमिस कार्यक्रम की लागत बढ़कर 93 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। इस कार्यक्रम में ब्लू ओरिजिन, एस्ट्रोबोटिक और अन्य निजी अंतरिक्ष कंपनियाँ भी भाग ले रही हैं, जो लैंडर और सतही परिवहन प्रणालियों के विकास में सहयोग कर रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव जल-बर्फ की संभावनाओं के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • CLPS कार्यक्रम के तहत नासा निजी कंपनियों से चंद्र डिलीवरी सेवाएँ खरीदता है।
  • लूनर गेटवे चंद्रमा की कक्षा में प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन है।
  • आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना है।

नासा की यह नई योजना अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। चंद्रमा पर स्थायी मानव बेस स्थापित करने का सपना आने वाले वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा दे सकता है।

Originally written on May 27, 2026 and last modified on May 27, 2026.

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