सारनाथ को यूनेस्को मान्यता, भारत की विरासत सूची और मजबूत हुई
उत्तर प्रदेश का प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हो गया है। 25 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में यह निर्णय लिया गया। इस मान्यता के साथ सारनाथ भारत का 45वां विश्व धरोहर स्थल और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है।
बौद्ध इतिहास में सारनाथ का विशेष स्थान
सारनाथ का संबंध भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के बाद दिए गए पहले उपदेश से है। इस घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है, जिसका अर्थ है धर्म के चक्र को गति देना। यही कारण है कि सारनाथ केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि बौद्ध परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। गंगा के मैदानों में बौद्ध धर्म के प्रारंभिक प्रसार में भी इस स्थल की अहम भूमिका रही।
यूनेस्को सूची में शामिल होने का महत्व
यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में वे सांस्कृतिक, प्राकृतिक और मिश्रित स्थल शामिल किए जाते हैं, जिनका असाधारण सार्वभौमिक महत्व होता है। 1972 में विश्व धरोहर सम्मेलन अपनाए जाने के बाद से यह सूची दुनिया भर की विरासत के संरक्षण का प्रमुख वैश्विक मंच बन गई है। किसी स्थल को सूची में शामिल करने से उसके संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय पहचान और पर्यटन संभावनाओं को नई मजबूती मिलती है। भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के कई ऐतिहासिक स्मारक, पुरातात्विक स्थल और प्राकृतिक क्षेत्र पहले से इस सूची में मौजूद हैं।
नामांकन से मान्यता तक की प्रक्रिया
सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया था। इसके बाद भारत ने जनवरी 2025 में 2025–26 नामांकन चक्र के लिए आधिकारिक आवेदन प्रस्तुत किया। किसी स्थल का संभावित सूची में होना औपचारिक नामांकन की पहली शर्त होती है। इसके बाद विस्तृत मूल्यांकन, दस्तावेजी जांच और समिति की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है। सारनाथ का चयन इस लंबी प्रक्रिया का परिणाम है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन 1972 में अपनाया गया था।
- विश्व धरोहर सूची में सांस्कृतिक, प्राकृतिक और मिश्रित श्रेणी के स्थल शामिल होते हैं।
- सारनाथ में भगवान बुद्ध के पहले उपदेश को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है।
- सारनाथ के जुड़ने के बाद भारत के कुल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 45 हो गए हैं।
इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा। सारनाथ की यह वैश्विक मान्यता भारत की समृद्ध सभ्यता और संरक्षण प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति भी है।