दिल्ली में ‘वीव्स ऑफ इंडिया’ से भारतीय हथकरघा विरासत को नई पहचान
नई दिल्ली में 24 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक आयोजित ‘वीव्स ऑफ इंडिया फेस्टिवल’ भारतीय हथकरघा परंपराओं की विविधता और समृद्ध विरासत को सामने ला रहा है। जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम में हो रहे इस आयोजन में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की 116 विरासत बुनाइयों को प्रदर्शित किया गया है।
भारतीय बुनाई परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन
यह उत्सव वस्त्रों को केवल प्रदर्शन की वस्तु नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत करता है। यहां बनारसी, जामदानी, कांजीवरम सिल्क और संबलपुरी इकत जैसी प्रसिद्ध हथकरघा शैलियां प्रमुख आकर्षण हैं। इन बुनाइयों की खासियत उनकी तकनीक, डिजाइन, क्षेत्रीय पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी में निहित है।ऐसे आयोजन यह भी दिखाते हैं कि भारतीय वस्त्र परंपरा केवल फैशन या सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों की आजीविका, कौशल और सांस्कृतिक स्मृति से गहराई से जुड़ी हुई है।
हथकरघा क्षेत्र क्यों महत्वपूर्ण है
हथकरघा उस कपड़े को कहा जाता है जो हाथ से चलने वाले करघे पर बुना जाता है, जिसमें बिजली से चलने वाली मशीनों का उपयोग नहीं होता। भारत का हथकरघा क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रों में गिना जाता है और यह ग्रामीण रोजगार, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय वस्त्र पहचान से सीधे जुड़ा है।इसी कारण हथकरघा से जुड़े कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं होते, बल्कि वे कारीगरों, बुनकरों और स्थानीय उत्पादन प्रणालियों को भी प्रोत्साहन देते हैं। यह क्षेत्र खादी और ग्रामोद्योग की परंपरा तथा भारत की व्यापक वस्त्र विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले बढ़ी गतिविधियां
यह उत्सव 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2015 में स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में की गई थी, जिसकी शुरुआत 1905 में हुई थी।इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य लोगों को भारतीय हथकरघा उत्पादों की ऐतिहासिक और सामाजिक अहमियत से जोड़ना है। साथ ही, यह मंच देश के विभिन्न हिस्सों की बुनाई शैलियों को एक साथ लाकर उनकी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है।
- इसकी शुरुआत 2015 में स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में की गई थी।
- सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम नई दिल्ली के जनपथ पर स्थित है।
- बनारसी, जामदानी, कांजीवरम सिल्क और संबलपुरी इकत भारत की प्रसिद्ध हथकरघा परंपराएं हैं।
‘वीव्स ऑफ इंडिया’ जैसे आयोजन भारतीय बुनकरों की कला को सामने लाने के साथ-साथ यह भी याद दिलाते हैं कि हथकरघा देश की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।