कोलकाता में खुला भारत का पहला इमर्सिव भाषा संग्रहालय
भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत को एक नए रूप में सामने लाने की दिशा में कोलकाता में एक अहम पहल हुई है। 19 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में देश का पहला इमर्सिव भाषा संग्रहालय ‘शब्दलोक’ या ‘म्यूजियम ऑफ वर्ड’ शुरू किया गया। यह संग्रहालय संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करता है और बेल्वेडियर हाउस में स्थित है।यह संग्रहालय केवल भाषाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भाषा के विकास, उसके ऐतिहासिक सफर और समाज-सभ्यता में उसकी भूमिका को अनुभवात्मक तरीके से प्रस्तुत करता है। खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक प्रदर्शनों के साथ आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया गया है, जिससे यह सामान्य संग्रहालयों से अलग अनुभव देता है।
भारत की भाषाई विरासत को नया मंच
शब्दलोक को भारत की भाषाई विरासत पर आधारित संग्रहालय के रूप में तैयार किया गया है। इसमें करीब 380 भाषाओं को प्रदर्शनों, कलाकृतियों और तकनीक-आधारित प्रस्तुतियों के जरिए दिखाया गया है। इनमें 2011 की जनगणना में दर्ज 121 भाषाएं भी शामिल हैं।इस संग्रहालय का उद्देश्य यह बताना है कि भारत की भाषाई परंपरा कितनी व्यापक, बहुस्तरीय और जीवंत रही है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान, इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इंटरैक्टिव गैलरियों से मिलेगा अनुभवात्मक ज्ञान
संग्रहालय में कुल नौ गैलरियां हैं, जिनमें भाषा के इतिहास, विकास और भारतीय सभ्यता में उसकी भूमिका से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को दिखाया गया है। इन गैलरियों में इंटरैक्टिव टचस्क्रीन, जेस्चर सेंसर, ऑडियो-विजुअल इंस्टॉलेशन, होलोग्राम और इमर्सिव डिस्प्ले सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है।यानी यहां आगंतुक सिर्फ पढ़ते या देखते नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए भाषा की यात्रा को महसूस भी कर सकते हैं। यही वजह है कि शब्दलोक को एक आधुनिक सांस्कृतिक अनुभव के रूप में देखा जा रहा है।
एआई, एआर और वीआर से बना खास विज़िटर अनुभव
शब्दलोक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों को भी जोड़ा गया है। इन डिजिटल साधनों की मदद से भाषा से जुड़ी सामग्री को अधिक रोचक और सहज बनाया गया है।इस तरह का संयोजन संग्रहालय को शैक्षिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है। खासकर छात्रों, शोधार्थियों और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक उपयोगी स्थान बन सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- शब्दलोक भारत का पहला इमर्सिव भाषा संग्रहालय है।
- यह कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में स्थित बेल्वेडियर हाउस में बनाया गया है।
- 2011 की जनगणना में भारत में 121 भाषाएं दर्ज की गई थीं।
- संग्रहालय 10:00 AM से 6:00 PM तक खुला रहता है, सोमवार को बंद रहता है और 15 अगस्त 2026 तक प्रवेश निःशुल्क है।
भाषाई विविधता वाले भारत में शब्दलोक जैसे संग्रहालय सांस्कृतिक संरक्षण और जन-जागरूकता दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। यह पहल दिखाती है कि परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर विरासत को नई पीढ़ी तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।