पेनांग का वड्डा गुरुद्वारा साहिब फिर खुला, सिख विरासत को नई पहचान
मलेशिया के पेनांग में स्थित वड्डा गुरुद्वारा साहिब लंबे संरक्षण और मरम्मत कार्य के बाद सितंबर 2026 में फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। 1901 में स्थापित यह 125 साल पुराना गुरुद्वारा दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा सिख गुरुद्वारा माना जाता है। इसे मलेशिया में श्रेणी-एक विरासत भवन का दर्जा प्राप्त है, जो इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता को दर्शाता है।
ऐतिहासिक विरासत और पुनर्स्थापन की जरूरत
पेनांग, जो मलेशियाई प्रायद्वीप के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है, भारतीय प्रवासी विरासत के लिहाज से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। वड्डा गुरुद्वारा साहिब की स्थापना 1901 में हुई थी और 2026 में इसके 125 वर्ष पूरे हुए। इसी अवसर पर इसके पुनर्स्थापन कार्य के बाद पुनः उद्घाटन किया गया।
यह गुरुद्वारा केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिख समुदाय की ऐतिहासिक उपस्थिति और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। लंबे समय तक संरचना को सुरक्षित रखने के लिए किए गए इस कार्य में मूल स्वरूप को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
पारंपरिक तकनीक से हुआ संरक्षण कार्य
पुनर्स्थापन परियोजना पर लगभग 60 लाख मलेशियाई रिंगिट खर्च किए गए। मरम्मत के दौरान आधुनिक सीमेंट की जगह पारंपरिक चूने के गारे का उपयोग किया गया, ताकि भवन की मूल बनावट और ऐतिहासिक रूप सुरक्षित रह सके।
गुरुद्वारे के लिए अमृतसर से एक बड़ा गुंबद मंगाया गया, जबकि सजावटी नक्काशी और बारीक काम के लिए तमिलनाडु के लगभग सात विशेषज्ञ कारीगरों ने योगदान दिया। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि विरासत संरक्षण में पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय विशेषज्ञता कितनी अहम भूमिका निभाती है।
धार्मिक अनुष्ठान और सामुदायिक महत्व
पुनः उद्घाटन के अवसर पर अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गगज ने अमृत वेला में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया। इस मौके पर गुरुद्वारा प्रबंधन समिति और पेनांग राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से विशेष समारोह आयोजित किया।
कार्यक्रम में मलेशिया के संघीय मंत्री स्टीवन सिम और पेनांग के उप मुख्यमंत्री-2 जगदीप सिंह देव भी शामिल हुए। इससे स्पष्ट होता है कि यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय समाज, प्रशासन और सांस्कृतिक विरासत के बीच संवाद का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- गुरु ग्रंथ साहिब सिख धर्म का केंद्रीय पवित्र ग्रंथ है।
- गुरुद्वारा सिखों का उपासना और सामुदायिक एकत्रीकरण स्थल होता है।
- अकाल तख्त सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक है और अमृतसर, पंजाब में स्थित है।
- मलेशिया में श्रेणी-एक विरासत भवनों को संरक्षण के लिए सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा मिलती है।
वड्डा गुरुद्वारा साहिब का पुनः उद्घाटन सिख विरासत संरक्षण की एक महत्वपूर्ण मिसाल है। यह न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय-सिख सांस्कृतिक उपस्थिति को भी नई पहचान देता है।