ईयू की सख्ती से गूगल पर 890 मिलियन यूरो का जुर्माना
यूरोपीय आयोग ने ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन पर गूगल पर 890 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई 2022 में लागू हुए यूरोपीय संघ के डिजिटल मार्केट्स एक्ट के तहत की गई, जिसका उद्देश्य बड़ी डिजिटल कंपनियों की बाजार-शक्ति पर नियंत्रण रखना और छोटे प्रतिस्पर्धियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।
क्यों लगाया गया जुर्माना
आयोग के अनुसार गूगल ने अपने ही उत्पादों और सेवाओं को खोज परिणामों में प्राथमिकता दी। इस तरह की प्रथा को self-preferencing कहा जाता है, यानी प्लेटफॉर्म अपने विकल्पों को प्रतिद्वंद्वी सेवाओं से ऊपर दिखाता है। इसी आधार पर 460 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया।दूसरा आरोप गूगल प्ले से जुड़ा था। नियामकों ने कहा कि ऐप डेवलपर्स को प्लेटफॉर्म के बाहर सस्ते भुगतान या खरीद विकल्पों की ओर उपयोगकर्ताओं को भेजने से रोका गया। इसे anti-steering restrictions कहा जाता है। इस उल्लंघन के लिए 430 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया।
डिजिटल मार्केट्स एक्ट क्या है
डिजिटल मार्केट्स एक्ट, या DMA, यूरोपीय संघ का ऐसा नियम है जो 2022 में लागू हुआ। इसका लक्ष्य उन बड़ी ऑनलाइन कंपनियों को नियंत्रित करना है जिन्हें gatekeepers कहा जाता है। ये वे प्लेटफॉर्म होते हैं जो सर्च इंजन, ऐप स्टोर और ऑनलाइन विज्ञापन जैसी मुख्य डिजिटल सेवाएं प्रदान करते हैं।इस कानून के तहत कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धा को दबाने के लिए नहीं करना चाहिए। यूरोपीय संघ का मानना है कि डिजिटल बाजार में कुछ बड़ी कंपनियों के अत्यधिक प्रभाव से उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों दोनों को नुकसान हो सकता है।
गूगल के लिए आगे क्या
यूरोपीय आयोग ने गूगल को 60 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने को कहा है। यदि कंपनी तय समय में अनुपालन नहीं करती, तो उस पर आगे और दंड लग सकता है, जो उसकी वैश्विक आय के 5% तक पहुंच सकता है।यह मामला यूरोपीय संघ और बड़ी टेक कंपनियों के बीच लंबे समय से चल रही निगरानी और कार्रवाई की श्रृंखला का हिस्सा है। गूगल का एंड्रॉयड सिस्टम पहले भी ईयू की प्रतिस्पर्धा जांच में 4.1 अरब यूरो के बड़े जुर्माने का सामना कर चुका है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संघ की कार्यकारी संस्था है और प्रतिस्पर्धा कानून लागू कराती है।
- डिजिटल मार्केट्स एक्ट 2022 में लागू हुआ और इसका फोकस बड़े डिजिटल गेटकीपर्स पर है।
- Self-preferencing का अर्थ है अपने उत्पादों या सेवाओं को प्रतिद्वंद्वियों से ऊपर प्राथमिकता देना।
- EU नियमों के तहत जुर्माना कंपनी के वैश्विक टर्नओवर से भी जोड़ा जा सकता है।
इस फैसले से साफ है कि यूरोपीय संघ डिजिटल बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है। आने वाले समय में बड़ी टेक कंपनियों पर ऐसे नियामकीय दबाव और बढ़ सकते हैं।