अमेरिका के नए टैरिफ ढांचे में भारत को मिली अपेक्षाकृत राहत
अमेरिका ने 24 जुलाई 2026 को अपने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए टैरिफ लागू किए। इस फैसले में भारत को 12.5% के बजाय 10% अतिरिक्त शुल्क वाले निचले स्लैब में रखा गया, और ये शुल्क 25 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गए। यह कदम वैश्विक व्यापार में अमेरिका की सख्त नीति और आपूर्ति शृंखलाओं पर उसके बढ़ते दबाव को दिखाता है।
धारा 301 क्या है और इसका महत्व क्यों है
धारा 301 अमेरिकी व्यापार कानून का एक अहम प्रावधान है, जिसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय उन विदेशी व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जिन्हें अनुचित, अवांछनीय या भेदभावपूर्ण माना जाता है। इसी प्रावधान के आधार पर अमेरिका ने कई देशों पर अलग-अलग दरों से अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं। इस बार भी कार्रवाई का आधार यह जांच थी कि क्या साझेदार देश जबरन श्रम से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं या नहीं।
भारत को कम दर क्यों मिली
भारत को अपेक्षाकृत कम 10% स्लैब में रखने के पीछे जून 2026 में लिया गया एक नीतिगत कदम अहम माना जा रहा है। उस समय भारत के विदेश व्यापार महानिदेशालय ने विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से बने सामान के आयात पर रोक लगा दी थी। इसी वजह से भारत को उन 17 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया जिन्हें कम दर वाले समूह में रखा गया। इस समूह में कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और मेक्सिको जैसे देश भी हैं।
व्यापार पर असर और आगे की स्थिति
नई व्यवस्था के बाद भारत के अमेरिका को होने वाले लगभग 70% निर्यात पर मौजूदा एमएफएन यानी Most-Favoured-Nation शुल्क के साथ 10% अतिरिक्त धारा 301 शुल्क लगेगा। हालांकि स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो कंपोनेंट जैसे उत्पादों पर धारा 232 के तहत पहले से लागू 25% से 50% तक के शुल्क जारी रहेंगे। धारा 232 अलग अमेरिकी प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आयातों पर किया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- धारा 301, अमेरिका के Trade Act, 1974 का हिस्सा है और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर कार्रवाई की अनुमति देती है।
- धारा 232 एक अलग अमेरिकी व्यापार प्रावधान है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आयातों पर लागू होता है।
- एमएफएन शुल्क वह मानक सीमा शुल्क है जो WTO सदस्य देशों से आयात पर लगाया जाता है।
- भारत का विदेश व्यापार महानिदेशालय, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, जबकि अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जुड़े एक अलग धारा 301 जांच मामले पर भी अभी निर्णय आना बाकी है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह शुल्क ढांचा दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।