प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी, नई प्रशासनिक दिशा पर नजर
धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने 26 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला। इसके साथ ही वे उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभालते रहे।
शिक्षा मंत्रालय की भूमिका और जिम्मेदारी
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के उन प्रमुख मंत्रालयों में शामिल है, जो स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, साक्षरता और इससे जुड़ी नीतियों का संचालन करता है। मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और उच्च शिक्षा विभाग जैसे अहम विभाग काम करते हैं। देश की शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम सुधार, संस्थागत ढांचे और नीति-निर्माण में इस मंत्रालय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
प्रल्हाद जोशी का राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव
प्रल्हाद जोशी कर्नाटक की धारवाड़ सीट से भारतीय जनता पार्टी के पांच बार सांसद रह चुके हैं। केंद्र सरकार में उनका अनुभव भी लंबा रहा है। वे 2019 से 2024 के बीच कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्रालयों में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी उनके लिए एक नई लेकिन महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका मानी जा रही है।
नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया
भारत में केंद्रीय मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर, संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत करते हैं। मंत्रिपरिषद में किसी भी विभागीय बदलाव या पोर्टफोलियो फेरबदल की सूचना राष्ट्रपति के आधिकारिक आदेश के माध्यम से जारी की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत शिक्षा मंत्रालय का प्रभार प्रल्हाद जोशी को सौंपा गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- धर्मेंद्र प्रधान जुलाई 2026 तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री थे।
- प्रल्हाद जोशी कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से पांच बार सांसद रह चुके हैं।
- शिक्षा मंत्रालय पहले 2020 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नाम से जाना जाता था।
- कर्तव्य भवन नई दिल्ली के सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास क्षेत्र का हिस्सा है।
प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति से शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है, जबकि उनके पास पहले से ही कई महत्वपूर्ण केंद्रीय विभागों का अनुभव मौजूद है। आने वाले समय में उनकी भूमिका शिक्षा क्षेत्र की नीतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में अहम होगी।