प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने की नई तकनीक
अमेरिकी ऊर्जा विभाग की ओक रिज नेशनल लैबोरेटरी (ORNL) के शोधकर्ताओं ने पॉलीएथिलीन प्लास्टिक को गैसोलीन और डीजल जैसे ईंधनों में बदलने की एक नई विधि विकसित की है। यह प्रक्रिया 21 सितंबर 2026 को सामने आई और इसकी खासियत यह है कि यह 200 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर काम करती है। प्लास्टिक कचरे के बढ़ते संकट के बीच यह शोध रासायनिक रीसाइक्लिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कैसे काम करती है यह प्रक्रिया
इस तकनीक में एल्युमिनियम-आधारित पिघले हुए लवणों का उपयोग एक साथ अभिक्रिया माध्यम और उत्प्रेरक, दोनों के रूप में किया गया है। पॉलीएथिलीन जैसी थर्मोप्लास्टिक सामग्री लंबी हाइड्रोकार्बन शृंखलाओं से बनी होती है। शोध का उद्देश्य इन लंबी शृंखलाओं को तोड़कर छोटे, ईंधन-योग्य अणुओं में बदलना है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अपेक्षाकृत सरल पॉलिमर शृंखलाओं से गैसोलीन जैसे उत्पाद अधिक बनते हैं, जबकि जटिल शृंखलाओं से डीजल जैसे उत्पाद निकलते हैं। प्रयोगों में पॉलीएथिलीन कचरे से लगभग 60% गैसोलीन प्राप्त हुआ, वह भी हल्की और कम ऊर्जा-खपत वाली परिस्थितियों में।
पारंपरिक पायरोलिसिस से क्या अलग है
प्लास्टिक को ईंधन में बदलने के लिए पायरोलिसिस एक जाना-पहचाना तरीका है, जिसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ऊष्मा देकर पदार्थ को तोड़ा जाता है। लेकिन पारंपरिक पायरोलिसिस में अक्सर 200 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान, बाहरी हाइड्रोजन, कार्बनिक विलायक या कीमती धातु उत्प्रेरकों की जरूरत पड़ती है। ORNL की नई विधि इन सीमाओं को कम करने की कोशिश करती है।
यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि प्लास्टिक कचरे का बड़ा हिस्सा रीसाइक्लिंग के पारंपरिक तरीकों से नहीं संभाला जा पाता। ऐसे में रासायनिक रीसाइक्लिंग, खासकर ईंधन-उत्पादन आधारित समाधान, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन दोनों क्षेत्रों में उपयोगी हो सकते हैं।
दुनिया में प्लास्टिक-से-ईंधन शोध की बढ़ती रफ्तार
प्लास्टिक को ईंधन में बदलने पर दुनिया भर में कई प्रयोग हो रहे हैं। अप्रैल 2026 में ब्रिटेन के सैंडविच, केंट में क्लीन प्लैनेट टेक्नोलॉजीज़ ने गैर-रीसाइक्लेबल प्लास्टिक से सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल बनाने के लिए एक पायलट सुविधा शुरू की थी। जुलाई 2025 में येल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 3D-प्रिंटेड, विद्युत-ऊष्मित कार्बन कॉलम रिएक्टर के जरिए उत्प्रेरक-रहित पायरोलिसिस विधि विकसित की थी।
इसी तरह जुलाई 2026 में UCLA सैमुअली स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग और इवा वुमन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिश्रित प्लास्टिक से उच्च-शुद्धता वाला हाइड्रोजन ईंधन बनाने की तकनीक पर काम किया। फरवरी 2025 तक मेक्सिको के बोका डेल रियो में पेटगैस संयंत्र लगभग 1.5 टन प्लास्टिक प्रति सप्ताह संसाधित कर गैसोलीन, डीजल और केरोसिन जैसे ईंधन बना रहा था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पॉलीएथिलीन पैकेजिंग, कंटेनर, फिल्म और बैग जैसे उत्पादों में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिकों में से एक है।
- पायरोलिसिस एक रासायनिक रीसाइक्लिंग प्रक्रिया है, जिसमें ऊष्मा की मदद से पॉलिमर को छोटे यौगिकों में तोड़ा जाता है।
- सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल विमानन क्षेत्र के लिए कम-कार्बन ईंधन श्रेणी है, जिसका उपयोग प्रमाणन और ब्लेंडिंग के बाद किया जाता है।
- जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी एक प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यूड रसायन विज्ञान पत्रिका है, जिसे अमेरिकन केमिकल सोसाइटी प्रकाशित करती है।
यह शोध दिखाता है कि प्लास्टिक कचरे को केवल नष्ट करने के बजाय उसे उपयोगी ईंधन संसाधन में बदला जा सकता है। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो यह अपशिष्ट प्रबंधन और वैकल्पिक ऊर्जा दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।