लद्दाख में गांव प्रमुखों का मानदेय बढ़ा, जमीनी प्रशासन को नई मजबूती
लद्दाख प्रशासन ने गांव स्तर पर काम करने वाले नंबर्दारों या गोबाओं के मासिक मानदेय में बड़ा इजाफा किया है। 21 सितंबर 2026 को यह राशि 1,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई। यह बदलाव 247 नंबर्दारों पर लागू होगा और 2016 के बाद पहली बार इस भुगतान में संशोधन किया गया है।
गांव प्रशासन में नंबर्दारों की भूमिका
लद्दाख में नंबर्दार स्थानीय प्रशासन की सबसे निचली लेकिन महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में इन्हें गोबा भी कहा जाता है। ये गांवों में प्रशासनिक समन्वय, सूचना के आदान-प्रदान और स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाए रखने में मदद करते हैं। इसलिए उनके मानदेय में वृद्धि को जमीनी प्रशासन को सशक्त करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
कितनी बढ़ी राशि और किस आधार पर
नया मानदेय 1,500 रुपये से बढ़कर 5,000 रुपये किया गया है, यानी इसमें 233 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह संशोधन जम्मू-कश्मीर लम्बर्दारी अधिनियम, 1972 और जम्मू-कश्मीर लम्बर्दारी नियम, 1980 के तहत तय किया गया है। ये प्रावधान 2019 में लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी वहां लागू हैं।
इस फैसले को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की मंजूरी मिली है। नई दरें आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावी होंगी। प्रशासन के अनुसार यह निर्णय गांवों के दौरे और 19 सितंबर 2026 को नंबर्दारों के प्रतिनिधिमंडल से हुई बैठक के बाद लिया गया।
प्रशासनिक संदर्भ और महत्व
लद्दाख जैसे दुर्गम और बिखरे हुए भौगोलिक क्षेत्र में गांव स्तर के प्रतिनिधियों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। नंबर्दार ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संपर्क सूत्र का काम करते हैं। ऐसे में लंबे समय बाद मानदेय में बढ़ोतरी न केवल उनके योगदान की मान्यता है, बल्कि स्थानीय शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश भी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लद्दाख 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत केंद्र शासित प्रदेश बना।
- “मानदेय” नियमित वेतन नहीं होता, बल्कि सेवाओं के लिए दिया जाने वाला निश्चित भुगतान है।
- जम्मू-कश्मीर लम्बर्दारी अधिनियम, 1972, क्षेत्र में लम्बर्दार व्यवस्था का आधार है।
- जम्मू-कश्मीर लम्बर्दारी नियम, 1980, इस व्यवस्था की प्रक्रियात्मक रूपरेखा तय करते हैं।
कुल मिलाकर, लद्दाख में नंबर्दारों के मानदेय में यह बढ़ोतरी गांव-स्तरीय प्रशासन को प्रोत्साहन देने वाला कदम है, जो स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका को और अधिक औपचारिक और सम्मानजनक बनाता है।