भारत ने डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा के लिए एआई मॉडल “मिथोस” पर शुरू किए परीक्षण

भारत ने डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा के लिए एआई मॉडल “मिथोस” पर शुरू किए परीक्षण

भारत सरकार देश की महत्वपूर्ण डिजिटल और वित्तीय प्रणालियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए एआई मॉडल “मिथोस” से जुड़े साइबर खतरों का परीक्षण कर रही है। इन परीक्षणों में आधार पहचान प्रणाली, सरकारी लॉगिन प्लेटफॉर्म और बैंकिंग से जुड़ी डिजिटल संरचनाओं को शामिल किया गया है। इस प्रक्रिया में भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियाँ, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In और कई सार्वजनिक संस्थान भाग ले रहे हैं। तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़ रहे हैं। इसी कारण भारत संभावित कमजोरियों का पहले से आकलन कर अपनी डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहा है।

मिथोस और फ्रंटियर एआई सुरक्षा

एंथ्रोपिक कंपनी ने 7 अप्रैल 2026 को “क्लॉड मिथोस प्रीव्यू” नामक अगली पीढ़ी का एआई मॉडल प्रस्तुत किया था। इस मॉडल को ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउज़र में मौजूद “ज़ीरो-डे कमजोरियों” की स्वतः पहचान और उनका उपयोग करने की क्षमता से जोड़ा जा रहा है। ज़ीरो-डे कमजोरियाँ वे सॉफ्टवेयर त्रुटियाँ होती हैं जिनकी जानकारी सॉफ्टवेयर निर्माता को नहीं होती या जिनके लिए अभी तक सुरक्षा अपडेट जारी नहीं किया गया होता। साइबर अपराधी ऐसी कमजोरियों का उपयोग कर संवेदनशील प्रणालियों पर हमला कर सकते हैं।

भारत का परीक्षण ढाँचा

भारत में इन परीक्षणों में इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियाँ भाग ले रही हैं। फिलहाल उन्हें सीधे “मिथोस” मॉडल तक पहुँच नहीं मिली है, इसलिए वे एंथ्रोपिक के “क्लॉड ओपस 4.7” मॉडल का उपयोग सुरक्षित वातावरण में कर रही हैं। CERT-In देश की महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचनाओं की सुरक्षा जाँच कर रहा है। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक ने मई 2026 में घरेलू बैंकों के साथ बैठकें आयोजित कर मिथोस से जुड़े संभावित साइबर खतरों पर चर्चा की।

प्रोजेक्ट ग्लासविंग और सीमित पहुँच

एंथ्रोपिक ने “मिथोस प्रीव्यू” के साथ “प्रोजेक्ट ग्लासविंग” भी शुरू किया है। इसके अंतर्गत लगभग 50 संगठनों और सरकारों को सीमित पहुँच प्रदान की गई है। इनमें ब्रिटेन सरकार, मोज़िला, पालो ऑल्टो नेटवर्क्स और क्लाउडफ्लेयर जैसी संस्थाएँ शामिल हैं। क्लाउडफ्लेयर के अनुसार यह मॉडल सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करने, एक्सप्लॉइट चेन तैयार करने और संभावित हमलों के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट बनाने में सक्षम पाया गया है।

वैश्विक साइबर सुरक्षा और एआई प्रतिक्रिया

25 मई 2026 को एंथ्रोपिक ने बताया कि मिथोस प्रीव्यू ने 1,000 से अधिक ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर परियोजनाओं में 23,000 से अधिक संभावित कमजोरियों की पहचान की। इनमें से 1,726 कमजोरियों की पुष्टि हुई, जिनमें 1,000 से अधिक उच्च या गंभीर श्रेणी की थीं। संयुक्त राज्य अमेरिका में भी एआई सुरक्षा को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। 6 मई 2026 को NIST ने घोषणा की कि उसका “सेंटर फॉर एआई स्टैंडर्ड्स एंड इनोवेशन” गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और xAI जैसे संगठनों के एआई मॉडलों का साइबर सुरक्षा मूल्यांकन करेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CERT-In भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी है।
  • आधार भारत की 12 अंकों वाली विशिष्ट पहचान प्रणाली है।
  • ज़ीरो-डे कमजोरियाँ सॉफ्टवेयर सुरक्षा के सबसे गंभीर जोखिमों में मानी जाती हैं।
  • NIST अमेरिका की राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्था है।

भारत द्वारा डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित साइबर खतरों का परीक्षण करना भविष्य की तकनीकी चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बढ़ती डिजिटल निर्भरता के बीच साइबर सुरक्षा और एआई नियमन आने वाले समय में वैश्विक प्राथमिकता बनते जा रहे हैं।

Originally written on May 27, 2026 and last modified on May 27, 2026.

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