सीमावर्ती इलाकों में नवीकरणीय परियोजनाओं पर नई सुरक्षा सख्ती

सीमावर्ती इलाकों में नवीकरणीय परियोजनाओं पर नई सुरक्षा सख्ती

गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास लगने वाली सौर, पवन और हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए नई राष्ट्रीय सुरक्षा गाइडलाइन जारी की है। इन नियमों का असर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां भूमि-सीमा सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता रखी जाती है।

1 किलोमीटर के भीतर नई परियोजनाओं पर रोक

नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा से 1 किलोमीटर के दायरे में किसी भी नई सौर, पवन या हाइब्रिड परियोजना की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने 1 से 50 किलोमीटर के दायरे को संवेदनशील क्षेत्र माना है और इस दायरे में प्रस्तावित हर परियोजना के लिए गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य कर दी है।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सीमा से 20 किलोमीटर के भीतर आने वाली परियोजनाओं को रक्षा मंत्रालय से अलग से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी लेना होगा। 1 से 50 किलोमीटर के बीच आने वाले प्रस्तावों की जांच अब मामले-दर-मामला आधार पर की जाएगी।

परियोजना मंजूरी और निवेशकों पर नई शर्तें

सीमावर्ती क्षेत्रों में लगने वाली सभी नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के आवेदन अब नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के पास भेजे जाएंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के इंजीनियरों, कर्मचारियों या श्रमिकों को केंद्रीय अनुमति के बिना इन परियोजनाओं में नहीं रखा जा सकेगा।

यदि किसी परियोजना की भूमि किसी विदेशी कंपनी को हस्तांतरित करनी हो, तो उसके लिए भी गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी। साथ ही, इन क्षेत्रों में अनिवार्य सुरक्षा उपायों, जिनमें एंटी-ड्रोन सिस्टम भी शामिल हैं, का खर्च डेवलपर को ही उठाना होगा।

पहले से मंजूर परियोजनाओं को राहत

जिन परियोजनाओं को इन गाइडलाइनों के जारी होने से पहले गृह मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। यानी नई व्यवस्था का असर मुख्य रूप से भविष्य में आने वाले प्रस्तावों पर पड़ेगा।

यह कदम ऊर्जा अवसंरचना और सीमा प्रबंधन के बीच बढ़ते तालमेल को दिखाता है। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा जोखिमों को कम करना भी सरकार की प्राथमिकता बनता जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अंतरराष्ट्रीय सीमा भारत और पाकिस्तान के बीच मान्य सीमा रेखा है, जबकि नियंत्रण रेखा जम्मू-कश्मीर के भारतीय और पाकिस्तानी-प्रशासित क्षेत्रों को अलग करती है।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण वाली सीमा मानी जाती है।
  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत में नवीकरणीय ऊर्जा नीति का नोडल मंत्रालय है।
  • सौर, पवन और हाइब्रिड परियोजनाएं भारत की गैर-जीवाश्म ऊर्जा विस्तार योजना का अहम हिस्सा हैं।

नई गाइडलाइन से साफ है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ऊर्जा विकास अब केवल आर्थिक या पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय भी माना जाएगा।

Originally written on August 8, 2026 and last modified on August 8, 2026.

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