तमिलनाडु में सरकारी आयोजनों की शुरुआत अब ‘तमिल ताई वाज़्थु’ से

तमिलनाडु में सरकारी आयोजनों की शुरुआत अब ‘तमिल ताई वाज़्थु’ से

तमिलनाडु विधानसभा ने 10 अगस्त 2026 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर राज्य के सभी आधिकारिक आयोजनों की शुरुआत में ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को पहला गीत बनाने का निर्णय लिया। यह व्यवस्था सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य के अन्य सार्वजनिक संगठनों पर लागू होगी। प्रस्ताव का उद्देश्य तमिल भाषाई पहचान और राज्य की सांस्कृतिक परंपरा को औपचारिक सरकारी समारोहों में प्राथमिक स्थान देना है।

राज्य गीत और भाषाई पहचान का सवाल

‘तमिल थाई वाझ्थु’ तमिलनाडु का राज्य गीत है और इसे तमिल अस्मिता से जोड़ा जाता है। इसके बोल 1891 में लिखे गए नाटक मनोनमणियम से लिए गए हैं, जिसके रचयिता तमिल विद्वान और नाटककार मनोनमणियम सुंदरनार थे। तमिल साहित्य परंपरा में उनका स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यह गीत केवल औपचारिक रचना नहीं बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक भी है।

विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव

यह प्रस्ताव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलगा वेत्री कझगम की ओर से पेश किया। विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर ने इसे वॉयस वोट के जरिए सर्वसम्मति से पारित घोषित किया। इस दौरान डीएमके, एआईएडीएमके, कांग्रेस और भाजपा सहित विभिन्न दलों का समर्थन मिला। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इस मुद्दे पर एक साझा सहमति बनी।

आधिकारिक समारोहों में गीतों के क्रम पर बहस

इस निर्णय की पृष्ठभूमि में 9 जुलाई 2026 को गृह मंत्रालय के उस निर्देश को भी देखा जा रहा है, जिसमें आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत में ‘वंदे मातरम्’ गाने को कहा गया था। तमिलनाडु विधानसभा की कार्रवाई मनोनमणियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के एक दीक्षांत समारोह में उठे विवाद के बाद आई, जहां ‘तमिल थाई वाझ्थु’ को ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान के बाद रखा गया था। राज्य ने इस क्रम को लेकर अपनी सांस्कृतिक प्राथमिकता स्पष्ट करने की कोशिश की है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तमिल थाई वाझ्थु तमिलनाडु का राज्य गीत है।
  • इसके बोल मनोनमणियम नामक 1891 के नाटक से लिए गए हैं।
  • मनोनमणियम सुंदरनार तमिल साहित्य और द्रविड़ साहित्य परंपरा से जुड़े प्रमुख विद्वान थे।
  • वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है और कई आधिकारिक समारोहों में गाया जाता है।

तमिलनाडु का यह फैसला राज्य की भाषाई-सांस्कृतिक पहचान को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह दिखाता है कि औपचारिक आयोजनों में गीतों का क्रम भी संवैधानिक और सांस्कृतिक बहस का विषय बन सकता है।

Originally written on August 10, 2026 and last modified on August 10, 2026.

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