केरल का नाम बदलकर केरलम करने वाला विधेयक लोकसभा से पारित

केरल का नाम बदलकर केरलम करने वाला विधेयक लोकसभा से पारित

केरल राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम उठाया गया है। लोकसभा ने 11 अगस्त 2026 को केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसका उद्देश्य भारतीय संविधान की प्रथम अनुसूची में दर्ज ‘केरल’ नाम को बदलकर ‘केरलम’ करना है। इससे पहले केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को राज्य का नाम बदलने के पक्ष में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था।

केरल से केरलम नाम रखने की वजह

‘केरलम’ राज्य के नाम का मलयालम रूप है और स्थानीय भाषा में इसका व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। राज्य विधानसभा में नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पेश करते समय यह तर्क दिया गया था कि भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बावजूद संविधान की प्रथम अनुसूची में राज्य का नाम ‘केरल’ दर्ज है। इसी कारण इसे स्थानीय भाषाई पहचान के अनुरूप ‘केरलम’ करने की मांग की गई।

केरल विधानसभा ने अगस्त 2023 में भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद 24 जून 2024 को नया प्रस्ताव पारित किया गया।

संविधान का अनुच्छेद 3 और नाम बदलने की प्रक्रिया

किसी राज्य का नाम बदलने की संवैधानिक शक्ति संसद के पास है। संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के गठन के साथ मौजूदा राज्यों के क्षेत्र, सीमाओं और नाम में परिवर्तन करने का अधिकार देता है।

इस प्रक्रिया में संबंधित विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश पर संसद में पेश किया जाता है। उससे पहले राष्ट्रपति प्रस्ताव को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास उसके विचार जानने के लिए भेजते हैं। हालांकि राज्य विधानसभा की राय इस संवैधानिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, अंतिम विधायी अधिकार संसद के पास रहता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी में दी थी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 फरवरी 2026 को ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को केरल विधानसभा के विचार के लिए भेजे जाने और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने का रास्ता खुला।

नाम परिवर्तन का प्रमुख उद्देश्य राज्य के आधिकारिक नाम को उसकी मलयालम भाषाई पहचान के अनुरूप बनाना है। केरल का गठन भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान 1 नवंबर 1956 को हुआ था और इसी तारीख को राज्य में केरल स्थापना दिवस मनाया जाता है।

प्रथम अनुसूची में होगा बदलाव

भारतीय संविधान की प्रथम अनुसूची में देश के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का विवरण दिया गया है। नाम परिवर्तन की पूरी वैधानिक प्रक्रिया संपन्न होने के बाद इसी अनुसूची में ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ दर्ज किया जाएगा।

राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम है और यह भारत के 28 राज्यों में शामिल है। नाम में बदलाव राज्य की भौगोलिक सीमाओं को नहीं बदलता, बल्कि उसकी आधिकारिक संवैधानिक पहचान में परिवर्तन करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संविधान का अनुच्छेद 3 नए राज्यों के गठन तथा मौजूदा राज्यों के क्षेत्र, सीमा और नाम में परिवर्तन से संबंधित है।
  • संविधान की प्रथम अनुसूची में भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का विवरण दिया गया है।
  • अनुच्छेद 3 के तहत संबंधित राज्य की विधानसभा से उसके विचार मांगे जाने का प्रावधान है।
  • ध्वनिमत में सदन के सदस्य मौखिक रूप से पक्ष या विपक्ष में अपनी राय व्यक्त करते हैं और सामान्यतः अलग-अलग मतों की रिकॉर्डिंग नहीं होती।

केरल से ‘केरलम’ का बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की मलयालम भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को आधिकारिक नाम में प्रतिबिंबित करने की पहल है। लोकसभा से विधेयक का पारित होना इस संवैधानिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है और आगे की संसदीय तथा संवैधानिक औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद नया नाम आधिकारिक रूप से प्रभावी होगा।

Originally written on August 10, 2026 and last modified on August 11, 2026.

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