लोकसभा से पारित ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, आयोग से बढ़ेगी निगरानी
लोकसभा ने 10 अगस्त 2026 को ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य देश के राष्ट्रीय ट्रिब्यूनलों की चयन प्रक्रिया, कामकाज और प्रशासन पर एक स्वतंत्र ढांचे के जरिए निगरानी करना है। सरकार का मानना है कि इससे इन अर्ध-न्यायिक संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और विशेषज्ञता आधारित नियुक्तियों को मजबूती मिलेगी।
ट्रिब्यूनल क्यों महत्वपूर्ण हैं
भारतीय न्याय व्यवस्था में ट्रिब्यूनल ऐसे वैधानिक निकाय हैं जो विशेष क्षेत्रों से जुड़े विवादों का निपटारा करते हैं। इनमें कर, पर्यावरण, सेवा मामले, कंपनी कानून और सशस्त्र बलों से जुड़े विवाद शामिल हैं। संविधान के अनुच्छेद 323A और 323B कुछ निर्दिष्ट क्षेत्रों में ट्रिब्यूनलों के गठन का आधार प्रदान करते हैं। सामान्य अदालतों पर बोझ कम करने और विशेषज्ञता के आधार पर त्वरित निर्णय देने के लिए इनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग की प्रस्तावित संरचना
विधेयक में नई दिल्ली मुख्यालय वाला पांच सदस्यीय राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग बनाने का प्रावधान है। इसके अध्यक्ष के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश को नियुक्त किया जाएगा। आयोग में दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य भी शामिल होंगे। यह संरचना इस विचार पर आधारित है कि ट्रिब्यूनलों के प्रशासन में न्यायिक अनुभव के साथ-साथ विषय-विशेष की तकनीकी समझ भी जरूरी है।
पुराने कानूनों से संबंध और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ
यह विधेयक ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को निरस्त करने का प्रस्ताव करता है। साथ ही, यह मूल अधिनियमों के अधिकार-क्षेत्र को बनाए रखते हुए नियुक्तियों, स्वतंत्रता और संचालन में पारदर्शिता से जुड़े प्रावधानों को व्यवस्थित करता है। यह कदम 19 नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें शक्तियों के पृथक्करण के उल्लंघन के आधार पर 2021 के कानून के कुछ अहम हिस्सों को रद्द कर दिया गया था। प्रस्तावित आयोग 16 प्रशासनिक निकायों को कवर करेगा, जिनमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण, सेबी अपीलीय अधिकरण, सशस्त्र बल अधिकरण और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
- सशस्त्र बल अधिकरण की स्थापना सशस्त्र बल अधिकरण अधिनियम, 2007 के तहत हुई थी।
- केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का गठन प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत किया गया था।
- ट्रिब्यूनल सामान्य अदालतों से अलग, विशेष विषयों के विवादों के लिए बनाए गए अर्ध-न्यायिक निकाय होते हैं।
कुल मिलाकर, यह विधेयक ट्रिब्यूनल व्यवस्था को अधिक संस्थागत और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस पर रहेंगी कि प्रस्तावित आयोग नियुक्तियों और प्रशासनिक नियंत्रण में कितना संतुलन स्थापित कर पाता है।