कर्नाटक विधान परिषद में नेतृत्व बदलाव, हॉरट्टी ने अध्यक्ष पद छोड़ा
कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज हॉरट्टी ने 7 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब परिषद में नई नेतृत्व व्यवस्था को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है और 14 अगस्त 2026 को अगला चुनाव तय है।
कर्नाटक विधान परिषद की संवैधानिक भूमिका
कर्नाटक विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय विधायिका का ऊपरी सदन है। संविधान के अनुच्छेद 169 के तहत किसी राज्य विधान परिषद के गठन या समाप्ति का प्रावधान है। यह सदन स्थायी होता है, यानी इसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके सदस्य अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाते हैं, जिनमें स्थानीय निकाय, स्नातक, शिक्षक और विधानसभा द्वारा चुने गए सदस्य शामिल होते हैं। कुछ सदस्यों को राज्यपाल नामित भी करते हैं।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी
विधान परिषद के अध्यक्ष का काम सदन की बैठकों की अध्यक्षता करना, कार्यवाही को व्यवस्थित रखना और नियमों के अनुसार चर्चा चलाना होता है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष वही जिम्मेदारियां निभाते हैं। ये दोनों पद राज्य विधानमंडल की आंतरिक कार्यप्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
राजनीतिक समीकरण और अगला चुनाव
7 अगस्त 2026 को 75 सदस्यीय कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस के पास बहुमत था। इसी आधार पर पार्टी ने अध्यक्ष पद के लिए सलीम अहमद और उपाध्यक्ष पद के लिए उमाश्री को अपना उम्मीदवार घोषित किया। परिषद के नेतृत्व के लिए औपचारिक चुनाव 14 अगस्त 2026 को होना तय किया गया। हॉरट्टी ने यह भी कहा कि 13 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले सत्र में वे प्रो-टेम चेयरमैन के रूप में कार्य करते रहेंगे, जब तक औपचारिक चुनाव नहीं हो जाता।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कर्नाटक विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय विधायिका का ऊपरी सदन है।
- संविधान का अनुच्छेद 169 राज्य विधान परिषद के गठन या समाप्ति से संबंधित है।
- विधान परिषद के पीठासीन अधिकारी को अध्यक्ष कहा जाता है, स्पीकर नहीं।
- विधान परिषद में स्थानीय निकाय, स्नातक, शिक्षक और विधानसभा-निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
बसवराज हॉरट्टी के इस्तीफे ने कर्नाटक विधान परिषद में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता खोल दिया है। अब 14 अगस्त को होने वाला चुनाव यह तय करेगा कि सदन की कमान किसके हाथ में जाएगी।