सीबीआई का ऑपरेशन चक्र-6: डिजिटल अरेस्ट ठगी नेटवर्क पर देशव्यापी कार्रवाई

सीबीआई का ऑपरेशन चक्र-6: डिजिटल अरेस्ट ठगी नेटवर्क पर देशव्यापी कार्रवाई

भारत में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 25 जून 2026 को ऑपरेशन चक्र-6 शुरू किया। इस अभियान का उद्देश्य देशभर में सक्रिय डिजिटल अरेस्ट ठगी नेटवर्क को ध्वस्त करना था। इस व्यापक अभियान के तहत 16 राज्यों के 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें सीबीआई की 60 विशेष टीमों ने भाग लिया। जांच में ऐसे संगठित साइबर गिरोहों का खुलासा हुआ, जो भारत के साथ-साथ विदेशों में भी लोगों को अपना शिकार बना रहे थे।

डिजिटल अरेस्ट ठगी क्या है?

डिजिटल अरेस्ट ठगी एक ऐसा साइबर अपराध है, जिसमें अपराधी स्वयं को पुलिस, अदालत या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते हैं। वे फोन कॉल, वीडियो कॉल या संदेशों के माध्यम से पीड़ितों को गिरफ्तारी का भय दिखाते हैं। विश्वास पैदा करने के लिए नकली नोटिस, जाली दस्तावेज और सरकारी वेबसाइटों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटों का उपयोग किया जाता है। मानसिक दबाव में आकर कई लोग ठगों के बताए गए बैंक खातों में बड़ी रकम स्थानांतरित कर देते हैं।

शेल कंपनियों और म्यूल बैंक खातों का खुलासा

सीबीआई की जांच में सामने आया कि इस ठगी नेटवर्क का संबंध शेल कंपनियों और म्यूल बैंक खातों से था। शेल कंपनियां ऐसी संस्थाएं होती हैं, जिनका वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं होता, लेकिन उनका उपयोग वित्तीय लेनदेन और धन शोधन के लिए किया जाता है। वहीं, म्यूल बैंक खाते अवैध धन को प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। जांच के दौरान चेन्नई के बी. नरेश और कोलकाता के संजीब साहा को गिरफ्तार किया गया। उन पर शेल कंपनियां बनाने और म्यूल बैंक खातों के संचालन में भूमिका निभाने का आरोप है। प्रारंभिक जांच के अनुसार इन खातों के माध्यम से लगभग दो करोड़ रुपये की संदिग्ध अपराध आय को ठिकाने लगाया गया।

फर्जी सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया कि अपराधियों ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट से मिलते-जुलते डोमेन नाम वाली एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार यह साइबर नेटवर्क 200 से अधिक डिजिटल अरेस्ट मामलों में सक्रिय था और इसकी गतिविधियां भारत के अलावा अन्य देशों तक फैली हुई थीं। यह गिरोह ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए विदेशी नागरिकों को भी निशाना बना रहा था।

फोरेंसिक जांच और आगे की कार्रवाई

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। इन सभी सामग्रियों की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्र किए जा सकें और पूरे साइबर नेटवर्क की संरचना तथा उससे जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान की जा सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है, जो गंभीर अपराधों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करती है।
  • भारत में साइबर अपराधों की जांच मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा आवश्यकता अनुसार भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत की जाती है।
  • म्यूल बैंक खातों का उपयोग प्रायः मनी लॉन्ड्रिंग, ऑनलाइन ठगी और अवैध धन के कई स्तरों पर हस्तांतरण के लिए किया जाता है।
  • फर्जी वेबसाइटें अक्सर आधिकारिक संस्थानों से मिलते-जुलते डोमेन नाम अपनाकर लोगों को भ्रमित करती हैं।

डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण हैं। ऐसे मामलों से बचने के लिए नागरिकों को किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या वेबसाइट पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। सीबीआई की यह कार्रवाई संगठित साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Originally written on June 25, 2026 and last modified on June 25, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *