सीओपी31 में 2035 तक बिजली की हिस्सेदारी 35% करने का प्रस्ताव

सीओपी31 में 2035 तक बिजली की हिस्सेदारी 35% करने का प्रस्ताव

जलवायु परिवर्तन से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर वैश्विक संक्रमण को तेज करने के उद्देश्य से सीओपी31 की संयुक्त अध्यक्षता कर रहे तुर्किये और ऑस्ट्रेलिया ने एक महत्वपूर्ण लक्ष्य प्रस्तावित किया है। 9 जून 2026 को बॉन जलवायु बैठक के दौरान “35 बाय 35” (35×35) नामक इस पहल की घोषणा की गई। प्रस्ताव के अनुसार वर्ष 2035 तक वैश्विक अंतिम ऊर्जा मांग में बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है ‘35 बाय 35’ लक्ष्य?

वर्तमान में वैश्विक अंतिम ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी लगभग 20 से 23 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। प्रस्तावित लक्ष्य के तहत इसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत तक पहुंचाने की योजना है। अंतिम ऊर्जा मांग का अर्थ उस ऊर्जा से है जिसका उपयोग सीधे उपभोक्ताओं द्वारा भवनों, परिवहन, उद्योगों और अन्य क्षेत्रों में किया जाता है। इस लक्ष्य का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा उपयोग के विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छ और विद्युत-आधारित प्रणालियों को अपनाने को प्रोत्साहित करना है।

सीओपी31 एक्शन एजेंडा का हिस्सा

यह प्रस्ताव सीओपी31 के “एक्शन एजेंडा” का हिस्सा है। एक्शन एजेंडा संयुक्त राष्ट्र जलवायु प्रक्रिया से जुड़ी ऐसी पहलों का समूह होता है जो बाध्यकारी नहीं होतीं। इसका अर्थ यह है कि इन लक्ष्यों को लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय के सभी सदस्य देशों की औपचारिक स्वीकृति आवश्यक नहीं होती। इसके बावजूद, ऐसे लक्ष्य देशों, उद्योगों और निवेशकों को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।

स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को मिलेगा बल

यह पहल भवनों, परिवहन और उद्योग क्षेत्रों में जीवाश्म ईंधनों की जगह स्वच्छ बिजली के उपयोग को बढ़ावा देने से जुड़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) और अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के विश्लेषणों ने इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह प्रस्ताव पेरिस समझौते के उस लक्ष्य के अनुरूप भी है, जिसके तहत वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का प्रयास किया जा रहा है।

अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्य भी शामिल

जून 2026 के एक्शन एजेंडा में केवल विद्युतीकरण का लक्ष्य ही नहीं है, बल्कि ऊर्जा दक्षता और संसाधन प्रबंधन से जुड़े अन्य उद्देश्य भी शामिल हैं। इसके तहत वर्ष 2035 तक भवन क्षेत्र में ऊर्जा खपत की तीव्रता को कम से कम 25 प्रतिशत घटाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, वैश्विक कचरे की वृद्धि दर को आधा करने का उद्देश्य भी निर्धारित किया गया है। हाल के वर्षों में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं ने ऊर्जा प्रणालियों को अधिक टिकाऊ बनाने की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट किया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सीओपी31 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का 31वां संस्करण है।
  • सीओपी31 का आयोजन 9 से 20 नवंबर 2026 तक तुर्किये के अंताल्या शहर में प्रस्तावित है।
  • पेरिस समझौता वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के प्रयासों पर केंद्रित है।
  • विद्युतीकरण को कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा उपयोग बढ़ाने का प्रमुख उपाय माना जाता है।

सीओपी31 के तहत प्रस्तावित “35 बाय 35” लक्ष्य वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। यदि दुनिया इस दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ती है, तो स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। यह पहल आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा और पर्यावरण नीतियों को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक साबित हो सकती है।

Originally written on June 10, 2026 and last modified on June 10, 2026.

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