ऑस्ट्रेलिया में मर्टल रस्ट के प्रसार से जुड़ी पश्चिमी मधुमक्खियों की भूमिका पर नई खोज

ऑस्ट्रेलिया में मर्टल रस्ट के प्रसार से जुड़ी पश्चिमी मधुमक्खियों की भूमिका पर नई खोज

ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों ने पाया है कि पश्चिमी मधुमक्खियां (एपिस मेलिफेरा) मर्टल रस्ट नामक खतरनाक पौध रोग के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मर्टल रस्ट एक फफूंदजनित रोग है, जो ऑस्ट्रेलिया की कई देशज पौध प्रजातियों को प्रभावित करता है। शोध के अनुसार मधुमक्खियां इस रोग के बीजाणुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाकर इसके फैलाव का माध्यम बन सकती हैं। यह खोज ऑस्ट्रेलिया की जैव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पश्चिमी मधुमक्खी क्या है?

पश्चिमी मधुमक्खी, जिसका वैज्ञानिक नाम Apis mellifera है, दुनिया की सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली परागणकर्ता प्रजातियों में से एक है। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए इन मधुमक्खियों का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया में व्यावसायिक कृषि के लिए मधुमक्खियों के छत्तों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान परागकणों, सूक्ष्मजीवों और अन्य जैविक पदार्थों का भी परिवहन होता है, जिससे रोगजनकों के प्रसार की संभावना बढ़ जाती है।

मर्टल रस्ट क्या है?

मर्टल रस्ट एक पौध रोग है जो Austropuccinia psidii नामक फफूंद के कारण होता है। यह रोग विशेष रूप से मर्टेसी (Myrtaceae) परिवार के पौधों को संक्रमित करता है। इस परिवार में नीलगिरी (यूकेलिप्टस), पेपरबार्क और बॉटलब्रश जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं। यह रोग पहली बार वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया में दर्ज किया गया था। वर्तमान में देश की लगभग 17 प्रतिशत स्थानिक वनस्पति इस फफूंद से प्रभावित होने के खतरे में मानी जाती है। रोग के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और गंभीर संक्रमण की स्थिति में पौधों की मृत्यु भी हो सकती है।

मधुमक्खियों द्वारा बीजाणुओं का प्रसार

वैज्ञानिकों ने देखा कि पश्चिमी मधुमक्खियां मर्टल रस्ट के बीजाणुओं को भोजन स्रोत के रूप में एकत्रित करती हैं और उन्हें अपने छत्तों तक ले जाती हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि ये बीजाणु मधुमक्खी के छत्तों के भीतर कम से कम नौ दिनों तक जीवित और संक्रामक बने रह सकते हैं। जब व्यावसायिक परागण के लिए छत्तों को विभिन्न क्षेत्रों में ले जाया जाता है, तो यह प्रक्रिया रोग के बीजाणुओं को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है। इससे पौध रोगों के प्रसार का जोखिम बढ़ जाता है।

ऑस्ट्रेलिया की जैव सुरक्षा चुनौतियां

ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से पौध और पशु रोगों के विरुद्ध मजबूत जैव सुरक्षा प्रणाली बनाए रखने का प्रयास करता रहा है। मर्टल रस्ट के अलावा देश को कई अन्य जैव सुरक्षा खतरों का भी सामना करना पड़ रहा है। इनमें Varroa destructor नामक परजीवी माइट प्रमुख है, जो यूरोपीय मधुमक्खियों को प्रभावित करता है। इसके अलावा Xylella fastidiosa नामक पौध रोगजनक भी गंभीर खतरा माना जाता है, जो 700 से अधिक पौध प्रजातियों में रोग उत्पन्न कर सकता है।

निगरानी और अनुसंधान का महत्व

ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों का उपयोग केवल परागण के लिए ही नहीं बल्कि पौध रोगों और वायरस की निगरानी के लिए भी किया जाता है। वैज्ञानिक मधुमक्खियों की गतिविधियों का अध्ययन करके रोगजनकों की उपस्थिति और प्रसार का पता लगाने का प्रयास करते हैं। नई खोज से यह समझने में मदद मिलेगी कि परागण नेटवर्क और व्यावसायिक मधुमक्खी पालन किस प्रकार पौध रोगों के प्रसार को प्रभावित कर सकते हैं। इससे भविष्य में बेहतर जैव सुरक्षा नीतियां विकसित करने में सहायता मिलेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Apis mellifera पश्चिमी मधुमक्खी का वैज्ञानिक नाम है।
  • Austropuccinia psidii वह फफूंद है जो मर्टल रस्ट रोग का कारण बनती है।
  • मर्टेसी (Myrtaceae) परिवार में यूकेलिप्टस, पेपरबार्क और बॉटलब्रश जैसे पौधे शामिल हैं।
  • Xylella fastidiosa ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले सबसे महत्वपूर्ण पौध रोगजनकों में से एक माना जाता है।

पश्चिमी मधुमक्खियों और मर्टल रस्ट के बीच संबंध की यह खोज पौध रोग प्रबंधन और जैव सुरक्षा अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है। इससे वैज्ञानिकों को रोग प्रसार के नए मार्गों को समझने और ऑस्ट्रेलिया की मूल्यवान देशज वनस्पतियों की सुरक्षा के लिए अधिक प्रभावी रणनीतियां विकसित करने में मदद मिलेगी।

Originally written on June 11, 2026 and last modified on June 11, 2026.

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